वॉशिंगटन/तेल अवीव/गाज़ा: अमेरिका द्वारा पेश किए गए नए युद्धविराम प्रस्ताव पर इज़राइल ने सहमति जताते हुए बड़ी पहल की है, लेकिन हमास ने तत्काल सहमति देने से इनकार करते हुए कहा है कि वे पहले प्रस्ताव की गंभीर समीक्षा करेंगे। इस घटनाक्रम ने गाज़ा में चल रहे संघर्ष को लेकर एक नई उम्मीद तो जगाई है, लेकिन राह अभी भी आसान नहीं है।
व्हाइट हाउस ने दी पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के माध्यम से यह प्रस्ताव हमास तक पहुंचाया गया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा,
“मैं पुष्टि करती हूं कि इज़राइल ने इस ताज़ा प्रस्ताव का समर्थन किया है। अब यह हमास पर निर्भर करता है कि वह इसे कैसे लेता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल वार्ता जारी है और हमास की तरफ से कोई औपचारिक उत्तर नहीं दिया गया है।
हमास ने जताई नाराज़गी, लेकिन रखा विकल्प खुला
हमास के वरिष्ठ नेता बासेम नैम ने मसौदे को लेकर कहा कि इसमें ऐसी कोई बात नहीं है जो उनके मूल उद्देश्य—जैसे युद्धविराम, अकाल की रोकथाम, और स्थायी समाधान—का समाधान करे।
“यह इज़राइली ज़िद और कब्जे को आगे बढ़ाने जैसा है,” नैम ने बयान में कहा।
इसके बावजूद, हमास ने यह भी जोड़ा कि वे प्रस्ताव को “राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी” के साथ विस्तार से परखेंगे और उस पर औपचारिक प्रतिक्रिया देंगे।
संभावित शांति की रूपरेखा क्या है?
स्रोतों के अनुसार, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित मसौदे में जिन बिंदुओं पर सहमति बनने की संभावना है, वे हैं:
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एक अस्थायी युद्धविराम
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बंधकों की सुरक्षित रिहाई
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मानवीय सहायता का सुगम प्रवाह
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दीर्घकालीन योजना के तहत गाज़ा से इज़राइली फोर्स की वापसी
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और अंततः गाज़ा में सत्ता का हस्तांतरण एक स्थानीय फिलिस्तीनी प्रतिनिधि समिति को
नेतन्याहू का रुख: ‘हमास का खात्मा जरूरी’
दूसरी ओर, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सभी बंधकों को मुक्त नहीं करवा लिया जाता और हमास पूरी तरह से निष्प्रभावी नहीं हो जाता, तब तक संघर्ष नहीं रोका जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इज़राइल गाज़ा पर भविष्य में नियंत्रण बनाए रखेगा और वहां की कुछ आबादी को पुनर्स्थापित करने की योजना है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों ने खारिज कर दिया है।
क्या हो सकता है आगे?
इस समय गाज़ा संघर्ष एक नाज़ुक मोड़ पर है। अमेरिका की पहल ने एक मौका जरूर दिया है, लेकिन हमास की प्रतिक्रिया और इज़राइल की कठोर शर्तें इस रास्ते को जटिल बना सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या यह प्रस्ताव स्थायी शांति की ओर पहला कदम बन पाएगा।
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