अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर चरम पर है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजिंग ने अमेरिका को धोखा दिया है और दोनों देशों के बीच हुआ व्यापार समझौता तोड़ दिया गया है।
“अब चीन से सख्ती से निपटना होगा” – ट्रंप
शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “चीन ने हमारे साथ किया गया समझौता पूरी तरह से तोड़ दिया है। अब मैं व्यापार के मामले में मिस्टर नाइस गाइ नहीं रहूंगा।” ट्रंप ने यह भी कहा कि वे शी जिनपिंग से बात जरूर करेंगे, लेकिन अब भरोसे की जगह सख्ती जरूरी है।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस समझौते की बात कर रहे हैं, पर ये बयान ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में दोनों देशों ने आयात शुल्कों में थोड़ी नरमी दिखाई थी।
बातचीत ठप, तनाव बढ़ता जा रहा है
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की है कि चीन के साथ व्यापार वार्ता रुक गई है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए अब नेताओं के स्तर पर सीधी बातचीत जरूरी है।
वहीं, चीनी दूतावास का कहना है कि जिनेवा में हुई पिछली बैठक के बाद से दोनों देश अपनी चिंताओं पर बात करते रहे हैं। चीन ने खासतौर पर कंप्यूटर चिप्स और उच्च तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर आपत्ति जताई है।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच बढ़ा कानूनी पेंच
ट्रंप के टैरिफ फैसलों पर इस सप्ताह एक अमेरिकी अदालत ने कहा कि वे अस्थायी रूप से लागू रह सकते हैं, हालांकि अदालत में मामला अभी लंबित है। कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रंप ने कुछ मामलों में अपने कानूनी अधिकारों की सीमाओं का अतिक्रमण किया हो सकता है।
वहीं, ट्रंप प्रशासन ने छात्रों के वीजा रद्द करने के साथ-साथ नए निर्यात नियंत्रण भी लागू किए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
टेक्नोलॉजी की होड़ और खनिजों की लड़ाई
चीन और अमेरिका के बीच संघर्ष सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च तकनीकी क्षमता में बढ़त बनाने की होड़ में हैं। अमेरिका चीन की उन्नत चिप्स तक पहुंच रोकना चाहता है, वहीं चीन ने दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर रोक लगाकर जवाब दिया है।
दिसंबर में चीन ने गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमनी जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर अंकुश लगाया और अप्रैल में नए निर्यात प्रतिबंध भी घोषित किए।
“चीन को दबाने की कोशिश” – बीजिंग का पलटवार
चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर राजनीतिक उद्देश्यों के तहत व्यापार को हथियार बनाने का आरोप लगाया। प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना बनाकर चीन को रोकने की कोशिश कर रहा है, और बीजिंग इसका कड़ा विरोध करता है।
निष्कर्ष: बातचीत के बजाय अब ‘बाजार की जंग’
जहां पहले उम्मीद की जा रही थी कि अमेरिका-चीन के संबंधों में व्यापार के स्तर पर सुधार होगा, अब दोनों पक्षों में अविश्वास और कठोरता की भावना हावी होती दिख रही है। सवाल यह है कि क्या यह टकराव केवल आर्थिक मोर्चे तक रहेगा, या इसके राजनीतिक और वैश्विक असर भी सामने आएंगे?
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