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चूरू जिले के सादुलपुर क्षेत्र में मौसम में अचानक बदलाव से गेहूं की फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले एक सप्ताह से सर्दी कम हो गई है और दिन में तेज धूप पड़ रही है। इसका सीधा असर रबी की मुख्य फसल गेहूं पर पड़ रहा है।
दाना बनने की अवस्था में फसल
इस समय गेहूं की फसल बालियां निकलने और दाना बनने की अवस्था में है। ऐसे समय में तापमान बढ़ने से दाने का भराव प्रभावित हो सकता है और उत्पादन कम होने का खतरा रहता है।
कृषि विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। हल्की जमीन वाले क्षेत्रों में खास सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए।
संभावित रोगों का खतरा
मौसम बदलने के साथ गेहूं में कई रोगों की आशंका बढ़ जाती है।
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पीला रतुआ (येलो रस्ट): पत्तियों पर पीली धारियां या धब्बे दिखाई देते हैं, जिससे पौधे की वृद्धि रुक सकती है। बचाव के लिए फफूंदनाशक का छिड़काव किया जा सकता है।
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कंडुआ और करनाल बंट रोग: बालियों के दाने काले पड़ जाते हैं और गुणवत्ता खराब हो जाती है। इससे बचने के लिए प्रमाणित बीज और संतुलित खाद का उपयोग जरूरी है।
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पत्तियों के सिरे सूखने की स्थिति में समय पर सिंचाई और सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्प्रे लाभदायक रहता है।
खाद और पोषण प्रबंधन
किसानों को जरूरत के अनुसार यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करनी चाहिए। साथ ही जिंक, सल्फर और अन्य सूक्ष्म तत्वों का छिड़काव करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और दाने अच्छे भरते हैं।
अधिक मात्रा में नाइट्रोजन देने से फसल गिरने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
सही समय पर सिंचाई जरूरी
तेज धूप और बढ़ते तापमान को देखते हुए सुबह या शाम के समय सिंचाई करना बेहतर है, ताकि पानी कम वाष्पित हो और फसल को पूरा लाभ मिले।
किसानों का मानना है कि अगर समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और रोग नियंत्रण के उपाय अपनाए जाएं तो इस साल गेहूं की पैदावार अच्छी रह सकती है।
मौसम में बदलाव के बीच किसानों की सतर्कता ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है।
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