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छतरपुर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इन दिनों खून की गंभीर कमी हो गई है। 300 यूनिट की क्षमता वाले इस सरकारी ब्लड बैंक में 20 फरवरी की सुबह तक सिर्फ 40 यूनिट खून ही बचा है।
इस कमी का सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है जिन्हें ऑपरेशन या डिलीवरी के समय तुरंत खून की जरूरत होती है। कई जरूरी ब्लड ग्रुप का स्टॉक बहुत कम हो चुका है।
ब्लड ग्रुप के अनुसार मौजूदा स्टॉक
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बी पॉजिटिव – 11 यूनिट
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बी नेगेटिव – 3 यूनिट
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ओ पॉजिटिव – 9 यूनिट
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ओ नेगेटिव – 6 यूनिट
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ए पॉजिटिव – 4 यूनिट
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ए नेगेटिव – 3 यूनिट
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एबी पॉजिटिव – 2 यूनिट
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एबी नेगेटिव – 2 यूनिट
कई ग्रुप जीवन रक्षक स्तर से भी नीचे पहुंच गए हैं।
मोबाइल वैन बेकार, कोई ठोस योजना नहीं
कुछ दिन पहले कलेक्टर ने ब्लड बैंक का निरीक्षण किया था, लेकिन इसके बाद भी खून की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया गया।
अस्पताल में ब्लड सेपरेशन यूनिट जैसी सुविधा होने के बावजूद खून की कमी होना प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।
रक्तदान के लिए खरीदी गई मोबाइल वैन अस्पताल परिसर में खड़ी है और उसका सही उपयोग नहीं हो रहा।
रक्तदान शिविरों की कमी
जिले में रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर कोई अभियान या शिविर नहीं लगाए जा रहे।
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की भी कमी है। युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने की ठोस कोशिश नहीं दिख रही।
मरीजों और परिजनों की परेशानी
छतरपुर ही नहीं, महोबा, टीकमगढ़ और पन्ना से आने वाले मरीज भी इस ब्लड बैंक पर निर्भर हैं।
खून की कमी के कारण तीमारदारों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
अक्सर लोग खून लेना चाहते हैं, लेकिन बदले में रक्तदान (एक्सचेंज) करने से बचते हैं।
नियम के अनुसार 1050 रुपये की रसीद और एक डोनर देने पर खून मिलता है।
डोनर न मिलने पर अस्पताल को बाहर से डोनर तलाशना पड़ता है, जिससे समय बर्बाद होता है।
प्रशासन का कहना
सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया के अनुसार, खून की कमी दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्य समस्या यह है कि लोग रक्त लेना चाहते हैं, लेकिन दान करने के लिए तैयार नहीं होते।
जल्द ही जागरूकता अभियान और रक्तदान शिविरों के जरिए स्टॉक बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
फिलहाल जरूरत है कि ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आकर रक्तदान करें, ताकि किसी मरीज की जान खून की कमी से खतरे में न पड़े।
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