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बस्तर। बस्तर संभाग के चार जिलों – बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए करीब 10 लाख क्विंटल धान अब भी खुले में पड़ा है। खरीदी को चार महीने हो चुके हैं, लेकिन उठाव और मिलिंग की प्रक्रिया में देरी की वजह से ये धान अब बारिश और नमी के कारण खराब होने की कगार पर पहुंच गया है।
बारिश और नमी से बिगड़ रही हालत
बस्तर में मानसून की दस्तक के बाद लगातार हो रही बारिश से खुले में रखा धान भीग रहा है। प्लास्टिक की शीट से ढकने की कोशिश की गई, लेकिन कई जगह नमी और फफूंद लगने की शिकायतें सामने आई हैं।
उठाव और मिलिंग में देरी
धान का उठाव इसलिए नहीं हो पा रहा क्योंकि:
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कस्टम मिलिंग के अनुबंध समय पर नहीं हुए।
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कुछ मिलर्स ने अनुबंध के बावजूद धान नहीं उठाया।
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कई संग्रहण केंद्रों से उठाव शुरू हुआ है, लेकिन रफ्तार बहुत धीमी है।
सरकारी राजस्व को हो सकता है नुकसान
अगर जल्द उठाव नहीं हुआ तो धान में नमी बढ़ जाएगी, जिससे इसका खाद्यान्न के रूप में उपयोग नहीं हो पाएगा। इससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
अधिकारियों के दावे और सच्चाई
जिला विपणन अधिकारी राजेंद्र कुमार ध्रुव का कहना है कि धान का उठाव धीरे-धीरे किया जा रहा है और जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि कई केंद्रों में बोरियों के ढेर अभी भी वैसे ही पड़े हैं और कर्मचारी खुद मानते हैं कि काम की रफ्तार बहुत धीमी है।
निष्कर्ष
अगर जल्द ही उठाव और मिलिंग की प्रक्रिया तेज नहीं की गई तो भारी मात्रा में धान खराब हो सकता है और सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ सकता है। समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
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