Breaking News

जल गंगा संवर्धन अभियान फेल, 1899 खेत तालाबों में से सिर्फ 276 पूरे, मजदूर बेरोजगार

जल संरक्षण और ग्रामीणों को रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू किया गया जल गंगा संवर्धन अभियान जिले में सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गया है। 30 मार्च से शुरू हुए इस अभियान के तहत जिले के सभी विकासखंडों में 1899 खेत तालाबों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक सिर्फ 276 तालाब ही पूरे हो पाए हैं। बाकी 1600 से ज्यादा तालाब अधूरे हैं या फिर सिर्फ फाइलों और ऑनलाइन रिकॉर्ड में ही बने हुए दिखाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तालाब बने ही नहीं, तो जल संरक्षण कहां हुआ और जब काम पर मजदूर ही नहीं दिखे, तो रोजगार किसे मिला?

66 करोड़ की योजना, नतीजा बेहद कमजोर

खेत तालाब योजना के लिए करीब 66 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इसमें से 28 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो गांवों में जल संरचनाएं तैयार हुईं और न ही मजदूरों को स्थायी काम मिला। कई जगह अधूरे गड्ढे और बंद पड़े काम इस योजना की सच्चाई दिखा रहे हैं।

कम मजदूरी, इसलिए गांव छोड़ रहे लोग

मनरेगा के तहत पंचायतों में मजदूरी 261 रुपये प्रतिदिन है, जबकि शहरों में यही मजदूरी 500 से 600 रुपये तक मिल रही है। इसी कारण जिले की पंचायतों से करीब 15 प्रतिशत लोग परिवार सहित शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव में काम ही नहीं मिलता, तो रुकने का कोई फायदा नहीं।

कागजों में तालाब, हकीकत में कुछ नहीं

कई पंचायतों में खेत तालाबों के निर्माण स्थल पर कोई मजदूर नहीं दिखता, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में काम चलता हुआ बताया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि मस्टर रोल भरकर मजदूरी निकाल ली जाती है, जबकि असल में काम अधूरा या बिल्कुल नहीं होता।

बने हुए तालाब भी अधूरे दिखाए जा रहे

कुछ पंचायतों में तालाब वास्तव में बन चुके हैं, लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण उनका पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो रहा। गौरिहार जनपद की सिसोलर, खड्डी, पड़वार, अमऊ और महोईखुर्द जैसी पंचायतों में करीब 20 तालाब पूरे होने के बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में अधूरे दर्ज हैं

नेताओं के खेतों में काम, आम मजदूर बाहर

नौगांव जनपद के उमऊ क्षेत्र में आरोप है कि पूर्व सरपंचों के खेतों में तालाब बनाए जा रहे हैं, जबकि उसी पंचायत के करीब 25 प्रतिशत लोग मजदूरी के लिए बाहर चले गए हैं। इससे मनरेगा और जल गंगा अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

मशीनों से काम, मजदूरों को नजरअंदाज

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई जगह नियमों के खिलाफ मशीनों से काम कराया जा रहा है, जिससे मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा। इससे योजना का असली उद्देश्य ही खत्म हो रहा है।

प्रशासन का दावा

जिला पंचायत सीईओ नम: शिवाय अरजरिया का कहना है कि जो काम पूरे हो चुके हैं, उनका निरीक्षण कर पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे और मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाएगी

हालांकि, करोड़ों रुपये खर्च होने और मजदूरों के पलायन के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि अब दिए गए निर्देश जमीन पर कितना असर दिखाएंगे

About admin

Check Also

निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 गाड़ियां, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने वाहन कम करने से किया इनकार!

बिहार में मंत्री के काफिले पर सियासत तेज, निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?