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राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार सुबह ACB की कई टीमों ने जयपुर, बाड़मेर, सीकर, जालोर, दिल्ली, बिहार और झारखंड सहित कुल 15 जगहों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
पूर्व वरिष्ठ IAS अधिकारी से पूछताछ
जानकारी के अनुसार, यह छापेमारी रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुबोध अग्रवाल और इस मामले से जुड़े करीब 15 अन्य लोगों के ठिकानों पर की गई। ACB की टीम उनके घर पर दस्तावेजों की जांच कर रही है और टेंडर प्रक्रिया को लेकर उनसे सवाल-जवाब किए जा रहे हैं।
आरोप है कि उनके कार्यकाल में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर कुछ कंपनियों को करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए।
किन लोगों पर कसा शिकंजा?
ACB के अधिकारियों के निर्देशन में चल रही इस कार्रवाई में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। इनमें केडी गुप्ता, निरिल कुमार, सुशील शर्मा, डीके गौड़, महेंद्र सोनी, विशाल सक्सेना, दिनेश गोयल, शुभांशु दीक्षित और अरुण श्रीवास्तव जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी से अलग-अलग जगहों पर पूछताछ की जा रही है और आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है।
15 ठिकानों पर कार्रवाई
यह छापेमारी केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रही। बिहार और झारखंड में भी उन कंपनियों से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी गई, जिनका इस घोटाले से संबंध होने की आशंका है। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत, डायरी और बैंक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
करीब 900 करोड़ रुपये का मामला
बताया जा रहा है कि यह घोटाला करीब 900 करोड़ रुपये का है। आरोप है कि कुछ कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर काम हासिल किया। इससे पहले इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी और कई इंजीनियरों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
ताजा कार्रवाई से साफ है कि जांच एजेंसियां इस मामले में बड़े अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
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