भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इस समय दुनिया के सबसे घातक गेंदबाजों में गिने जाते हैं। जब भी वह गेंदबाजी करते हैं, तो बल्लेबाजों के लिए रन बनाना मुश्किल हो जाता है। हाल ही में भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेली थी, जिसमें बुमराह ने सिर्फ 3 मुकाबलों में ही हिस्सा लिया।
अंतिम और सबसे अहम मुकाबले में वह टीम का हिस्सा नहीं थे। इसकी वजह थी उनका वर्कलोड और घुटने की हल्की चोट। यह मुकाबला लंदन के ओवल मैदान में खेला गया था, जिसमें टीम इंडिया ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को 6 रन से हरा दिया। इस जीत से भारत ने सीरीज को 2-2 से बराबर किया। इस निर्णायक मैच में मोहम्मद सिराज ने शानदार गेंदबाजी करते हुए टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। टीम की जीत के बाद पूरा देश जश्न में डूब गया। क्रिकेट फैंस खिलाड़ियों की तारीफ कर रहे थे। लेकिन इसी बीच जसप्रीत बुमराह सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वह क्यों नहीं खेले?
एक तरफ कुछ लोग कह रहे हैं कि बुमराह को पूरी टेस्ट सीरीज खेलनी चाहिए थी क्योंकि वह भारत के नंबर-1 तेज गेंदबाज हैं।
वहीं दूसरी तरफ कुछ फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि बुमराह ने सही फैसला लिया, क्योंकि उनका शरीर लगातार खेलने से थक सकता था और उन्हें इंजरी का खतरा भी था।
आज के समय में क्रिकेटर सालभर क्रिकेट खेलते हैं – टेस्ट, वनडे, टी20 और लीग्स। ऐसे में शरीर पर बहुत दबाव रहता है। खासकर तेज गेंदबाजों के लिए लगातार खेलना आसान नहीं होता। चोट से बचने और लंबा करियर बनाए रखने के लिए खिलाड़ियों को बीच-बीच में ब्रेक देना जरूरी होता है। इसी को “वर्कलोड मैनेजमेंट” कहा जाता है।
बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) भी इस बात को गंभीरता से लेता है और अपने अहम खिलाड़ियों को जरूरी समय पर आराम देता है ताकि वे लंबे समय तक फिट और फॉर्म में रहें।
जसप्रीत बुमराह ने जब आराम लिया, तब मोहम्मद सिराज ने जिम्मेदारी निभाई और मैच जिताने वाला प्रदर्शन किया। इससे टीम को जीत मिली और बुमराह को आराम भी मिल गया। इससे साफ होता है कि अगर खिलाड़ियों का सही से प्रबंधन किया जाए, तो टीम को नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही होता है।
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