Related Articles
जोधपुर/राजस्थान: मारवाड़ क्षेत्र के किसानों के लिए खुशखबरी है। जोधपुर जिले के सबसे बड़े जल स्रोत जसवंत सागर बांध को फिर से भरने (रीचार्ज) की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसके लिए रुड़की के केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 50 लाख रुपए मंजूर किए हैं। अगर यह योजना सफल होती है, तो पश्चिमी राजस्थान के 24 विधानसभा क्षेत्रों में जल संकट काफी हद तक खत्म हो सकता है और हजारों किसानों की जिंदगी बदल सकती है।
लंबे समय से उठ रही थी मांग
जसवंत सागर बांध संघर्ष समिति, स्थानीय संस्थाएं और संगठन इस योजना की मांग कर रहे थे। विधायक अर्जुनलाल गर्ग ने यह मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया था।
उन्होंने कहा कि परियोजना के सफल होने से:
-
भूजल स्तर बढ़ेगा
-
पेयजल संकट से राहत मिलेगी
-
किसानों को सिंचाई में मदद मिलेगी
-
पलायन करने वाले लोग वापस आ सकेंगे
विधायक ने दिए वैज्ञानिकों को सुझाव
विधायक गर्ग ने रुड़की से आए वैज्ञानिकों को सुझाव दिए कि कम खर्च में ज्यादा पानी संग्रहित हो, इसके लिए तकनीकी रूप से मजबूत योजना बनाएं। उनके प्रमुख सुझाव थे:
-
मदासर पेयजल योजना की पाइपलाइन को जोधपुर की बजाय पिचियाक के रास्ते जसवंत सागर में लाया जाए।
-
जवाई बांध की नहर को गजनाई तक लाकर वहां से पानी छोड़ा जाए।
-
माही नदी से पाचना और रायपुर होते हुए जसवंत सागर को जोड़ा जाए।
-
बीसलपुर डिस्पोजल लाइन को भी जसवंत सागर से जोड़ा जाए।
-
यमुना लिंक परियोजना के तहत आने वाले पानी को लूणी नदी से होकर जसनगर में डाला जाए।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें
क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि अगर यह योजना जमीन पर उतरी, तो आनासागर से सांचौर और कुचेरा-खींवसर से नागौर तक का इलाका पानी की समस्या से मुक्त हो सकता है। इससे खेती बढ़ेगी और पलायन कर चुके लोग वापस अपने गांव लौटेंगे।
सरकार की प्राथमिकता में है जल संकट
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने इस योजना को प्राथमिकता दी है। विधानसभा में उठी मांग को बजट में शामिल करना, सरकार की जनहितकारी सोच को दर्शाता है।
– अर्जुनलाल गर्ग, विधायक बिलाड़ा
CHANNEL009 Connects India
