राजस्थान सरकार ने मेवाड़ और वागड़ के सीमावर्ती जिलों में जल संकट को दूर करने के लिए जाखम बांध पेयजल परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है। इस परियोजना से चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर और राजसमंद के 2497 गांव-ढाणियों में पाइपलाइन के जरिए पीने का शुद्ध पानी पहुंचेगा।
परियोजना का खर्च और चरण
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परियोजना दो चरणों में पूरी होगी।
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प्रथम चरण: चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ के 800 गांव-ढाणियों में पानी पहुँचाना। खर्च: 1692.30 करोड़ रुपए। टेक्निकल बिड 16 फरवरी को खोली जाएगी।
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दूसरा चरण: उदयपुर और राजसमंद के 1697 गांव-ढाणियों में पानी पहुँचेगा। खर्च: 1953.26 करोड़ रुपए।
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कुल परियोजना खर्च: 3645.56 करोड़ रुपए।
योजना का लाभ
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घर-घर शुद्ध पेयजल की उपलब्धता।
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गहराते जल संकट का स्थायी समाधान।
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समय और श्रम की बचत।
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निर्माण कार्य से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
चारों जिलों में ब्लॉक और गांव-ढाणी
चित्तौड़गढ़: डूंगला, कपासन, निम्बाहेड़ा, बड़ी सादड़ी, भदेसर, भोपालसागर, राशमी – कुल 1251 गांव-ढाणी
प्रतापगढ़: छोटी सादड़ी – 172 गांव-ढाणी
राजसमंद: रेलमगरा, राजसमंद, आमेट, कुंभलगढ़ – कुल 790 गांव-ढाणी
उदयपुर: भिण्डर, वल्लभनगर, मावली – कुल 907 गांव-ढाणी
भू-जल स्थिति
चित्तौड़गढ़ जिले के अधिकांश ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में हैं। भूमिगत जल स्तर लगातार गिर रहा है, इसलिए यह परियोजना विशेष महत्व रखती है।
अगला कदम
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टेक्निकल बिड 16 फरवरी को खोली जाएगी।
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फाइनेंशल स्वीकृति मिलने के बाद ही टेंडर जारी किया जाएगा।
सूत्र: सुनीत कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्री विभाग, चित्तौड़गढ़
इस योजना से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में पीने के पानी की किल्लत खत्म होने और ग्रामीणों की जीवनशैली में सुधार होने की उम्मीद है।
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