होक्काइडो | 25 जून 2025
जापान ने मंगलवार को पहली बार अपनी धरती पर सतह से जहाज पर मार करने वाली मिसाइल (surface-to-ship missile) का परीक्षण किया। यह कदम मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए उठाया गया है, जिसमें चीन की सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी सबसे अहम कारण मानी जा रही है।
🧭 कहां और क्या हुआ?
जापान की ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) ने उत्तरी द्वीप होक्काइडो में स्थित एक प्रशिक्षण क्षेत्र से “टाइप-88” मिसाइल को प्रशांत महासागर की ओर दागा।
आमतौर पर ऐसे परीक्षण अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किए जाते रहे हैं, लेकिन वे काफी महंगे साबित होते हैं और उनमें सीमित सैनिक ही भाग ले पाते हैं।
📢 सरकार की सफाई
सरकारी प्रवक्ता योशिमासा हयाशी ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा:
“ऐसे घरेलू लाइव-फायर अभ्यास हमारे सैनिकों को बेहतर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। मौजूदा कठिन सुरक्षा माहौल में हमारी द्वीप रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए ये बेहद जरूरी हैं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभ्यास किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं था, लेकिन जापान पूर्व में चीन को सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा बता चुका है।
🇨🇳 चीन और ताइवान पर नज़र
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बीजिंग द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे सैन्य दबदबे को देखते हुए जापान अपनी सैन्य तैयारी तेज कर रहा है।
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ताइवान पर चीन के संभावित हमले को लेकर अमेरिका और जापान दोनों ने साझा प्रतिक्रिया रणनीति विकसित करनी शुरू की है।
💰 खर्च और रणनीति
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जापानी येन की गिरती कीमत ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर प्रशिक्षण की लागत और बढ़ा दी है।
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जापान अब NATO मानक के अनुरूप, अपने रक्षा खर्च को GDP का 2% तक बढ़ाने की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है।
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साथ ही, अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन को मजबूत करते हुए दोनों सेनाओं को अधिक लचीला और त्वरित कार्रवाई में सक्षम बनाया जा रहा है।
🔚 निष्कर्ष
यह परीक्षण इस बात का संकेत है कि जापान अब रक्षा स्वावलंबन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। घरेलू परीक्षणों से न केवल लागत कम होगी, बल्कि अधिक सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों में प्रशिक्षण भी मिल सकेगा। आने वाले समय में जापान की यह नीति पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
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