Breaking News

जालोर की युवती को डमी अभ्यर्थी बनाकर बनाया प्राध्यापक, आरोपी वर्षा बिश्नोई पर एक और मामला दर्ज

सरकारी टीचर ने की धांधली, पहले से ही जेल में बंद है आरोपी

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित प्राध्यापक (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2018 में जालोर की पुनासा निवासी पालु कुमारी को डमी अभ्यर्थी के जरिए प्राध्यापक बनाया गया। इस मामले में पहले से ही जेल में बंद लेक्चरर वर्षा बिश्नोई पर एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने एक और केस दर्ज किया है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

एटीएस-एसओजी के एडीजी वी.के. सिंह के अनुसार, परीक्षा के लिए भरे गए आवेदन पत्र, प्रोविजनल ई-प्रवेश पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच में पता चला कि असली आवेदनकर्ता पालु कुमारी थी, लेकिन परीक्षा में बैठने वाली अभ्यर्थी कोई और थी। जब दस्तावेजों की तुलना की गई, तो हस्ताक्षर और फोटो अलग-अलग मिले। जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा देने वाली वर्षा बिश्नोई थी।

अब एसओजी इस मामले में पालु कुमारी की तलाश कर रही है और वर्षा बिश्नोई के खिलाफ एक और मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि वर्षा पहले भी डमी अभ्यर्थी बनने के मामले में पकड़ी जा चुकी है, लेकिन बाद में उसने अपना पता बदलकर पुलिस सत्यापन करवा लिया था।

दो बहनों के लिए दी थी परीक्षा, दोनों बनी थानेदार

2021 की एसआई भर्ती परीक्षा में वर्षा बिश्नोई ने दो बहनों – इंदुबाला और भगवती – की जगह परीक्षा दी थी। एसआई जगदीश सिहाग ने 15-15 लाख रुपए देकर वर्षा को डमी अभ्यर्थी बनाया, जिससे दोनों बहनों का चयन थानेदार के रूप में हो गया।

  • इंदुबाला की परीक्षा 13 सितंबर 2021 को हुई थी।

  • भगवती की परीक्षा 14 सितंबर 2021 को हुई थी।

  • परीक्षा में इंदुबाला को 1139वीं और भगवती को 239वीं रैंक मिली।

  • वर्षा ने खुद भी एसआई की परीक्षा दी और 834वीं रैंक हासिल की, लेकिन उसने ज्वाइन नहीं किया।

इस घोटाले का खुलासा होने के बाद पुलिस वर्षा की तलाश में जुटी और आखिरकार अक्टूबर 2023 में उसे कोटा से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ।

पहले भी कर चुकी है फर्जीवाड़ा

जोधपुर में हुई पटवारी भर्ती परीक्षा-2021 में भी वर्षा बिश्नोई डमी अभ्यर्थी बनकर बैठी थी। वह मूल अभ्यर्थी कोयली देवी की जगह परीक्षा दे रही थी, तभी पकड़ी गई। इस मामले में जोधपुर के महामंदिर थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था।

इसके बाद वह बाड़मेर में अपने पिता के घर रहने के बजाय जालोर में नाना के घर रहने लगी और वहां के दस्तावेज बनवा लिए। पता बदलने के कारण पुलिस सत्यापन के दौरान उसकी यह धोखाधड़ी पकड़ में नहीं आई और वह लेक्चरर की नौकरी में लग गई।

अब एसओजी इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और अन्य जुड़े लोगों की भी तलाश की जा रही है।

About admin

Check Also

निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 गाड़ियां, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने वाहन कम करने से किया इनकार!

बिहार में मंत्री के काफिले पर सियासत तेज, निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?