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टाइगर के मूवमेंट से ग्रामीणों में डर: बाहर निकलना हो रहा मुश्किल

करौली-धौलपुर वन्यजीव अभ्यारण्य के आसपास के क्षेत्र में बाघों की आवाज सुनाई देने लगी है। बाघों का बढ़ता मूवमेंट और हमले की घटनाएं लोगों के लिए चिंता का कारण बन गई हैं। हाल ही में रीछरा क्षेत्र में एक बाघ ने नंदी पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

नंदी पर बाघ का हमला

रीछरा गांव के पास तीन दिन पहले बाघ ने एक नंदी पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद से वन विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। दो दिन पहले रात को शीतलपुरा के जंगल में भी बाघ का मूवमेंट देखा गया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। इस समय रबी फसल का सीजन है, और किसान दिनभर खेतों में काम कर रहे हैं, लेकिन बाघ के डर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।

बाघों के गांवों के आसपास आने का कारण

रेंजर देवेन्द्रसिंह चौहान ने बताया कि करौली-धौलपुर वन्यजीव अभ्यारण्य के आसपास बाघों को पालतू और लावारिस जानवर आसानी से मिल जाते हैं, इसलिए वे गांवों के आसपास आ जाते हैं। खुशहालपुर से रीछरा और शीतलपुरा तक जंगलों में अक्सर जंगली जानवरों का मूवमेंट रहता है, जो पालतू जानवरों को अपना शिकार बना लेते हैं।

ग्रामीणों की चिंता

शीतलपुरा के जंगल में हाल ही में बाघ को 10 फीट ऊंची अटारी पर आराम करते हुए कैमरे में कैद किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के मूवमेंट से वे डर के मारे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

वन्यजीवों की मौजूदगी

सरमथुरा रेंज में 40 से अधिक पैंथर, 250 गीदड़, 25 जरख, 10 से 15 लोमड़ी, 15 से 20 भेडिया और 25 से 30 भालू हैं। इसके अलावा, 400 के करीब नीलगाय और 500 से अधिक जंगली सूअर भी इलाके में मौजूद हैं।

संरक्षण उपाय

बाघों के मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग ने रात में गश्त और कैमरों के जरिए जानवरों की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे खेतों में जाएं तो झुंड बनाकर जाएं, ताकि बाघ का खतरा कम हो सके।

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