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ट्रंप के 79वें जन्मदिन पर अमेरिका में विरोध की लहर, सैन्य परेड और ‘नो किंग्स’ आंदोलन ने बंटा माहौल

14 जून 2025, अमेरिका में एक ऐतिहासिक दिन बन गया—जहां एक ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मदिन और अमेरिकी सेना की 250वीं वर्षगांठ पर वॉशिंगटन डीसी में विशाल सैन्य परेड आयोजित हुई, वहीं दूसरी ओर देशभर में ‘No Kings’ नामक विरोध अभियान के तहत हजारों नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर तानाशाही की मानसिकता के खिलाफ आवाज बुलंद की।

सभी 50 राज्यों में विरोध, ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ का नारा

देश के सभी 50 राज्यों में एक साथ विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रंप की कार्यशैली लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत, लोग यह संदेश देना चाहते थे कि अमेरिका एक गणराज्य है, किसी एक व्यक्ति की सत्ता नहीं चलेगी।

कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। कुछ शहरों में आंसू गैस और फ्लैश बम का प्रयोग किया गया जिससे लॉस एंजेलिस जैसे इलाकों में माहौल तनावपूर्ण हो गया।

सैन्य परेड पर 43 मिलियन डॉलर का खर्च

वहीं ट्रंप प्रशासन द्वारा आयोजित की गई भव्य सैन्य परेड पर लगभग 350 करोड़ रुपये (43 मिलियन डॉलर) खर्च हुए, जिसे विपक्ष ने करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताया। आलोचकों ने दावा किया कि यह आयोजन सेना की वर्षगांठ से अधिक ट्रंप की व्यक्तिगत छवि को चमकाने के लिए किया गया था।

क्या यह अमेरिकी परंपरा के खिलाफ है?

विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इंगित किया कि अमेरिका में सैन्य परेड की परंपरा प्रचलित नहीं है और पिछली बार ऐसा आयोजन 1991 में हुआ था। इस वजह से ट्रंप की यह पहल राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित मानी जा रही है।

ट्रंप प्रशासन पर गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों और सामाजिक संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप सरकार, लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर कर रही है और अपनी सैन्य शक्ति को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

आव्रजन नीति और लॉस एंजेलिस की हिंसा

ट्रंप सरकार द्वारा हाल ही में अवैध प्रवासियों पर की गई छापेमारी के बाद लॉस एंजेलिस में विरोध तेज हो गया था, जो अंततः हिंसा में बदल गया। हालात पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रपति ने नेशनल गार्ड्स की तैनाती का आदेश दिया, जिसने स्थिति को और उग्र बना दिया।

प्रदर्शन जारी

न्यूयॉर्क, शिकागो, डेनवर और ऑस्टिन जैसे प्रमुख शहरों में भी सरकारी नीतियों के खिलाफ मार्च निकाले गए। नागरिकों का कहना है कि मौजूदा सरकार की दिशा अन्यायपूर्ण और कठोर है।

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