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ट्रंप ने जताया युद्धविराम का समर्थन करने का संकेत, बोले – “परिस्थितियों पर निर्भर करेगा फैसला”

इज़राइल-ईरान हवाई संघर्ष के एक सप्ताह बीतने के बाद अब अमेरिका की भूमिका को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे “परिस्थितियों के आधार पर” इस संघर्ष में युद्धविराम का समर्थन कर सकते हैं।

“फिलहाल ज़मीन पर सैनिक भेजने का कोई इरादा नहीं”

जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान को हराने के लिए जमीनी कार्रवाई की ज़रूरत होगी, तो ट्रंप ने जवाब दिया –

“मैं जमीन पर सेना भेजने की बात नहीं करूंगा, क्योंकि यही आखिरी चीज़ है जो कोई चाहेगा।”

ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब 13 जून 2025 से शुरू हुआ यह हवाई युद्ध मिडिल ईस्ट को एक बार फिर अस्थिरता के दलदल में धकेल रहा है। इसराइल ने ईरान पर हमला यह कहकर किया था कि वह तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना चाहता है। जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमलों से इज़राइल को निशाना बनाया है।


“ईरान अब यूरोप से नहीं, अमेरिका से बात करना चाहता है” – ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि उन्हें यूरोप की कूटनीतिक कोशिशों से ज्यादा उम्मीद नहीं है। उनके अनुसार:

“ईरान अब यूरोप से बात नहीं करना चाहता। वे सीधे अमेरिका से संवाद चाहते हैं। यूरोप इस युद्ध में ज्यादा मदद नहीं कर पाएगा।”

हालांकि शुक्रवार को जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री ने यूरोपीय नेताओं से मुलाकात की थी। बैठक का उद्देश्य था ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर राजनयिक बातचीत का रास्ता फिर से खोलना, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।


अमेरिका की भूमिका को लेकर अनिश्चितता बनी हुई

व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले दो सप्ताह में यह तय करेंगे कि अमेरिका को इस युद्ध में किसी भी रूप में भाग लेना चाहिए या नहीं। ट्रंप की नीति फिलहाल डिप्लोमेसी और सैन्य हस्तक्षेप के बीच झूल रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय असमंजस में है।

परमाणु हथियारों पर बहस तेज

इज़राइल मिडिल ईस्ट का एकमात्र ऐसा देश माना जाता है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। इज़राइल का दावा है कि उसके हमले तेहरान को अपना परमाणु बम विकसित करने से रोकने के लिए हैं। दूसरी ओर, ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का हस्ताक्षरकर्ता है — जबकि इज़राइल इस संधि का हिस्सा नहीं है।


अब तक कितना नुकसान?

मानवाधिकार समूह Human Rights Activists News Agency के अनुसार:

  • इज़रायली हमलों में अब तक 639 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है।

  • ईरान की जवाबी कार्रवाई में 24 इज़रायली नागरिक मारे गए हैं।


निष्कर्ष: मध्य पूर्व एक बार फिर विश्व युद्ध के मुहाने पर?

अब सबकी निगाहें ट्रंप पर हैं — क्या वह एक नया युद्ध रोकने में सफल होंगे, या फिर अमेरिका इस बार भी अपने पारंपरिक सहयोगी इज़राइल के साथ खड़ा होगा?

यह संघर्ष न सिर्फ ईरान और इज़राइल के बीच है, बल्कि यह अमेरिका की विश्व भूमिका और पश्चिम एशिया की स्थिरता को भी तय करेगा।

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