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ढाई करोड़ खर्च कर बढ़ौना पंचायत में बनाए 18 तालाब, पहाड़ी पर तालाब के नाम खानापूर्ति

दबंगों द्वारा की जा रही सरपंची, सीईओ बोले- तीन साल हो गए, मैंने भी नहीं देखा सरपंच को, तालाब निर्माण के नाम पर पैसों की बर्बादी

मुरैना. जौरा जनपद पंचायत की बढ़ौना ग्राम पंचायत में करीब 2.50 करोड़ की लागत से 18 तालाब बनाए गए हैं, इनमें से रेलवे पटरी से कुछ ही दूरी पर स्थित पहाड़ी पर जहां दूर दूर तक कहीं भी पानी रोकने की कोई संभावना नहीं हैं, उसके बाद भी ग्राम पंचायत ने पहाड़ी के ऊपर चार तालाब व एक स्टॉप डेम का निर्माण कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।

ग्राम पंचायत बढ़ौना में पहाड़ी के ऊपर एक ही जगह चार तालाब, स्टॉप डेम का नियम विरुद्ध निर्माण किया गया है। पंचायत की सरपंच मनीषा शाक्य का कहीं कोई अता पता नहीं हैं, सीईओ जनपद जौरा ने भी यह बात स्वीकार की है कि तीन साल से मैंने तो सरपंच को एक बार भी नहीं देखा है। पंचायत के विकास कार्य गांव के दबंगों द्वारा किए जा रहे हैं। शासन द्वारा जल संग्रहण योजना द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे स्थानों पर तालाब व स्टॉप डेम का निर्माण कराने के लिए करोड़ों रुपया जिला पंचायत को दिया जा रहा है। यहां से सेटिंग के तहत ग्राम पंचायतों को राशि जारी की जाती है। एक तालाब के निर्माण के लिए करीब 14 लाख रुपए और स्टॉप डेम के लिए 12 लाख रुपए जारी किए जा रहे हैं। बढ़ौना पंचायत में भी 18 तालाबों का निर्माण कराया गया है। यहां नियम विरुद्ध पहाड़ी के ऊपर एक ही जगह चार तालाब व एक स्टॉप डेम बनाकर 90 लाख से अधिक शासकीय धन को पानी की तरह बहा दिया है।

नाम के तालाब, सामग्री के नाम पर सिर्फ लगे पत्थर

लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए तालाबों सिर्फ नाम के हैं। इनमें कुछ स्थानों पर सिर्फ पत्थर लगा है। वह भी कहीं से खरीदकर नहीं लाया गया है, ज्यादातर पत्थर स्थानीय स्तर से निकला हुआ है। अगर इन तालाबों को भौतिक सत्यापन कराया जाए तो जो राशि खर्च हुई, उसकी चौथाई हिस्से की राशि भी इन तालाबों पर खर्च नहीं हुई होगी।

सरपंच के थरा के मकान पर भी लटके ताले

बढ़ौना ग्राम पंचायत की सरपंच मनीषा शाक्य मूलतह थरा गांव की रहने वाली है। लेकिन इन दिनों उसके थरा गांव में बने मकान पर भी ताले पड़े हैं। बढ़ौना गांव की सरपंची कर रहे दबंगों ने सरपंच मनीषा को अपने ग्वालियर स्थित मकान पर पहुंचा दिया है। यह बात स्वयं गांव में सरपंची कर रहे दबंगों ने स्वीकार की है। पंचायत में जो भी गड़बड़ी हो रही है, उसमें जनपद पंचायत के अधिकारियों की मिली भगत होने की आशंका है।

ये कहना हैं ग्रामीणों का

जिला पंचायत सीईओ सहित अन्य अधिकारियों को वर्ष 2023 से लगातार लिखित में शिकायत कर रहे हैं। मनीषा शाक्य सरपंच गांव में नहीं रहती। सरपंची एक पंचायत सचिव के परिवार के लोग कर रहे हैं। वही फर्जी तरीके से हस्ताक्षर करके पंचायत में निर्माण कार्य करवा रहे हैं। तालाबों के निर्माण पर खानापूर्ति की गई है।

श्रीलाल जाटव, ग्रामीण

बढ़ौना पंचायत के अंतर्गत जिन तालाबों का निर्माण किया गया है, उनमें खानापूर्ति की गई है। उसमें जो खंडा लगे हैं, वह पहाड़ी से निकालकर लगाए गए हैं। पूर्व में शिकायत हुई है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनपद पंचायत के अधिकारियों की सांठगांठ से दबंग पंचायत में विकास कार्य कर रहे हैं।

कृष्णा यादव, ग्रामीण

इंजीनियर बोले, सेक्रेटरी के भाई कर रहे हैं सरपंची

बढ़ौना गांव की सरपंच मनीषा शाक्य है लेकिन हमने आज तक नहीं देखा। सरपंची तो सेक्रेटरी के भाई कर रहे हैं, वहीं काम करवा रहे हैं। गांव में 18 तालाबों का निर्माण कराया गया है। तालाब वहीं बनाए गए हैं, जहां पानी का बहाव होता है। पहाड़ी पर बनाए गए तालाबों की जांच कराएंगे।

सोनेराम शाक्य, इंजीनियर, जनपद पंचायत जौरा

जौरा जनपद पंचायत के सीईओ कुलदीप श्रीवास्तव से सीधी बात

पत्रिका: बढ़ौना पंचायत में पहाड़ी पर तालाब बनाए हैं, उनमें खानापूर्ति की गई है।
सीईओ: तकनीकी अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच करवाएंगे, गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
पत्रिका: पंचायतों में जो निर्माण कार्य हो रहे हैं, उनकी मॉनीटरिंग नहीं होती।
सीईओ: पंचायतों में निर्माण कार्य की मॉनीटरिंग के लिए उपयंत्री, सहायक यंत्री हैं।
पत्रिका: बढ़ौना पंचायत की सरपंच मनीषा शाक्य का परिवार थरा गांव में रहकर मजदूरी करता है, सरपंची कौन कर रहा है।
सीईओ: बढ़ौना में सरपंची कौन कर रहा है, यह तो नहीं पता लेकिन यह बात सही है कि बढ़ौना पंचायत की सरपंच मनीषा शाक्य ही है लेकिन पिछले तीन साल में अभी तक मुझे पंचायत में एक बार भी नहीं मिली है।
पत्रिका: गांव में सरपंच नहीं हैं तो फिर काम कौन करवा रहा है।
सीईओ: गांव में विकास कार्य के लिए हमारा सरकारी कर्मचारी पंचायत सचिव है, वही काम करवाता है।

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