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उत्तर प्रदेश की तहसीलों और कलेक्ट्रेट कार्यालयों में भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मनमानी की लगातार शिकायतें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
किसानों और आम लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई
किसानों और आम जनता का आरोप है कि तहसीलों में काम समय पर नहीं होता और बिना रिश्वत के काम अटक जाते हैं। भारतीय किसान यूनियन और अन्य संगठनों ने कई बार धरना-प्रदर्शन भी किए। इन्हीं शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए तहसीलों और कलेक्ट्रेट के निरीक्षण के आदेश दिए हैं।
फरवरी में होगा अनिवार्य निरीक्षण
मुख्य सचिव ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि फरवरी महीने में सभी तहसीलों और कलेक्ट्रेट कार्यालयों का विशेष निरीक्षण किया जाए। इस निरीक्षण की पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जो सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखी जाएगी।
मेरठ मंडल से होगी शुरुआत
निरीक्षण की शुरुआत मेरठ मंडल से होगी। तय कार्यक्रम के अनुसार—
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9 फरवरी: मेरठ
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11 फरवरी: गाजियाबाद
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12 फरवरी: बुलंदशहर
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14 फरवरी: बागपत
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20 फरवरी: हापुड़
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26 फरवरी: गौतमबुद्धनगर
डीएम भी करेंगे तहसीलों का दौरा
मंडलायुक्त के निरीक्षण के साथ-साथ जिलाधिकारी भी अपनी-अपनी तहसीलों का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान तहसीलों की कार्यप्रणाली, लंबित मामलों और जनसुविधाओं की गहन समीक्षा की जाएगी। अधिकारी पहले से ही व्यवस्थाएं सुधारने में जुट गए हैं।
किन बातों की होगी जांच
निरीक्षण के दौरान इन बिंदुओं पर खास ध्यान दिया जाएगा—
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तहसील परिसर की साफ-सफाई
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पेयजल और बैठने की व्यवस्था
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राजस्व मामलों का निपटारा
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शिकायतों के समाधान की स्थिति
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प्रमाण पत्र (जाति, निवास, चरित्र आदि) जारी करने की प्रक्रिया
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IGRS और तहसील दिवस से जुड़े मामलों की प्रगति
सरकार का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि इस अभियान का मकसद तहसीलों में पारदर्शिता लाना और आम लोगों को समय पर न्याय दिलाना है। जहां भी गड़बड़ी पाई जाएगी, वहां तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी, ताकि जनता को राहत मिल सके।
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