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बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले में मल्लीनाथ तिलवाड़ा पशु मेला शुरू हो गया है। इस मेले में देशभर के किसान और पशुपालक बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
ऊंट और घोड़ों के दाम चौंकाने वाले
इस बार मेले में 545 ऊंट पहुंचे, जिनकी कीमत ₹23,000 से लेकर ₹32,000 तक रही। वहीं, घोड़ों की खरीद-फरोख्त में भी खासा उत्साह देखा गया। मेले में सबसे महंगा घोड़ा ₹5.51 लाख में बिका। कुछ उम्दा नस्ल के घोड़ों की कीमत ₹25 से ₹50 लाख तक बताई जा रही है, जिनकी बिक्री मेले के बाद बड़े व्यापारियों के बीच होगी।
पिछले साल से ज्यादा पशु पहुंचे
इस साल 2300 घोड़े, 545 ऊंट और 114 गोवंश मेले में पहुंचे, जो पिछले साल की तुलना में 500 ज्यादा हैं। प्रशासन की अच्छी प्लानिंग और सरकारी सहयोग से आने वाले वर्षों में यह संख्या तीन से चार गुना तक बढ़ सकती है।
पशुपालकों के लिए सुविधाएं बढ़ें तो मेले का विकास संभव
तिलवाड़ा मेले को और बड़ा और प्रभावी बनाने के लिए कुछ सुधार जरूरी हैं:
✔️ पशुपालकों को रहने, पानी, छाया और चारे की बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए।
✔️ मेले का प्रचार-प्रसार बाड़मेर और बालोतरा में तीन महीने पहले से किया जाए।
✔️ ऊंटनी के जन्म पर ₹20,000 की सहायता राशि मेले में दी जाए, जिससे पशुपालक ऊंटनी लेकर आएं।
✔️ राजस्थान दिवस के दौरान मेले में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाए, ताकि पशुपालकों की भागीदारी बढ़े।
✔️ पशुपालन विभाग मेले में 15 दिन का विशेषज्ञ पशु चिकित्सा शिविर लगाए और मुफ्त दवाएं वितरित करे।
✔️ पशुपालकों को नि:शुल्क टेंट की सुविधा मिले, जिससे वे अपने पशुओं को मेले में ला सकें।
अगर इन सुझावों को लागू किया जाए तो तिलवाड़ा पशु मेला भारत का सबसे बड़ा पशु मेला बन सकता है।
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