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दीनारपुर की जमीन मामला: हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, प्रमुख सचिव की भूमिका पर उठे सवाल

दीनारपुर की सीलिंग की जमीन को लेकर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत का कहना है कि अब तक कार्रवाई न होने से यह शक पैदा होता है कि कहीं निजी लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश तो नहीं की गई, ताकि समय-सीमा का लाभ लेकर मामला खत्म हो जाए।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि प्रमुख सचिव की मंशा उनके आगे के कदमों से तय होगी। राज्य सरकार के वकील के अनुरोध पर अदालत ने प्रमुख सचिव को एक दिन का और समय दिया है, ताकि यह बताया जा सके कि सरकार जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करना चाहती है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी।


अधिकारियों पर कार्रवाई अभी भी संभव

प्रमुख सचिव ने हाईकोर्ट में 2012 से जुड़े अधिकारियों की सूची पेश की। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, जबकि कई अभी सेवा में हैं।
कोर्ट ने कहा कि जिन अधिकारियों पर पहली नजर में यह आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर मामले को लटकाया और इससे राज्य की जमीन पर कब्जा कराने में मदद मिली, उनके खिलाफ अब भी कार्रवाई की जा सकती है—यहां तक कि सेवानिवृत्ति के बाद भी विभागीय कार्रवाई संभव है।


अवकाश का बहाना नहीं चलेगा

राज्य की ओर से दलील दी गई कि प्रमुख सचिव अवकाश पर थे और अरुणाचल प्रदेश में होने के कारण समय पर फैसला नहीं ले सके।
इस पर कोर्ट ने साफ कहा कि अवकाश में कटौती करनी चाहिए थी या नहीं, यह अदालत नहीं तय करेगी। यह राज्य सरकार को तय करना है कि क्या उसके अधिकारी राज्य की संपत्ति की रक्षा को लेकर गंभीर हैं या नहीं


क्या है पूरा मामला

  • दीनारपुर में 9 बीघा सीलिंग की जमीन है।

  • सिविल कोर्ट में शासन यह केस हार गया।

  • इसके बाद 2008 में पहली अपील दायर की गई, जो 2012 में अदम पैरवी (पैरवी न होने) के कारण खारिज हो गई।

  • अपील को फिर से सुनवाई में लाने के लिए 2019 में आवेदन दिया गया।

  • मामले की सुनवाई जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की बेंच में चल रही है।

  • कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्योरा मांगा था, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।


ये अधिकारी हो चुके हैं सेवानिवृत्त

  • उमा करारे — 31/10/2021

  • अनुज कुमार रोहतागी — 30/11/2024

  • आर.सी. मिश्रा — 31/07/2017

  • राघवेंद्र कुमार पांडेय — 29/09/2020 (निधन)

  • कृपाराम शर्मा — 30/11/2016

  • रविनंदन तिवारी — 30/06/2025


वर्तमान में सेवा में अधिकारी

  • सी.बी. प्रसाद — अपर कलेक्टर

  • अशोक चौहान — उपायुक्त (राजस्व)

  • प्रशांत त्रिपाठी — सेवा में

👉 कुल मिलाकर, हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि जिम्मेदारी तय होगी और अब आगे की कार्रवाई से ही सरकार और प्रमुख सचिव की भूमिका स्पष्ट होगी।

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