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दूध में केमिकल-डिटर्जेंट मिलाना जहर देने जैसा, नकली दूध बनाने वाले 9 दोषियों को 10-10 साल की जेल
नकली दूध बनाने और बेचने के मामले में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि दूध में केमिकल और डिटर्जेंट मिलाना लोगों को जहर देने के समान है। इस मामले में 9 दोषियों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 5-5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामला नकली दूध तैयार कर बाजार में सप्लाई करने से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि दूध की मात्रा बढ़ाने और उसे असली जैसा दिखाने के लिए उसमें केमिकल, डिटर्जेंट और अन्य मिलावटी पदार्थ मिलाए जा रहे थे। यह दूध आम लोगों तक पहुंच रहा था, जिससे लोगों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता था।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दूध बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों तक इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसमें मिलावट करना केवल खाद्य कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
अदालत ने माना कि दोषियों ने आर्थिक लाभ के लिए आम लोगों की जान और सेहत को खतरे में डाला। इसी आधार पर कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाते हुए संदेश दिया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
फैसले के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मिलावटखोरी रोकने के लिए आगे भी जांच अभियान जारी रहेंगे।
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