अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपने फैसलों को लेकर चर्चा में हैं—इस बार वजह हैं वो निर्णय जिनसे अमेरिका के पुराने और घनिष्ठ मित्र देश खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यूक्रेन, यूरोप, कनाडा और अब इज़राइल—ट्रंप की नीतियों ने इन सहयोगियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान, कतर और तुर्किये जैसे देशों के साथ बढ़ती नजदीकियां एक नए भू-राजनीतिक समीकरण को जन्म दे रही हैं।
इज़राइल से दूरी, ईरान से डील
डोनाल्ड ट्रंप, जो कभी इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी माने जाते थे, अब उनसे टकराव के मूड में हैं। ईरान को लेकर दोनों नेताओं की सोच में गहरा अंतर है। नेतन्याहू जहां तेहरान पर सैन्य कार्रवाई के पक्षधर हैं, वहीं ट्रंप कूटनीतिक रास्ता अपनाते हुए एक बड़े समझौते की ओर बढ़ रहे हैं। अमेरिकी कांग्रेस ने भी ट्रंप को ईरान से डील न करने की सलाह दी, लेकिन ट्रंप ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
व्यापारिक हित सर्वोपरि
ट्रंप की विदेश नीति का केंद्र स्पष्ट है—जहां से अमेरिका को आर्थिक लाभ हो, वहां रिश्ते मजबूत होंगे, चाहे वह सहयोगी हो या पूर्व विरोधी। इसी सोच के तहत उन्होंने कतर के साथ 1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार समझौता किया। वहीं तुर्किये को मिसाइलें देने का सौदा भी इसी कड़ी का हिस्सा है। इस ‘बिजनेस फर्स्ट’ नीति ने पारंपरिक मित्र देशों को असहज कर दिया है, खासकर तब जब उन्हें आर्थिक या सैन्य मोर्चे पर झटका दिया गया हो।
ट्रंप को कतर से मिला अनोखा तोहफा
कतर के शाही परिवार की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप को एक वीवीआईपी बोइंग 747-8 जेट गिफ्ट में दिया जा सकता है। यह विमान तकनीकी दृष्टि से अत्यंत उन्नत है, लेकिन अमेरिका की खुफिया एजेंसियां इस गिफ्ट को लेकर सशंकित हैं। उन्हें डर है कि जब तक यह विमान एयरफोर्स वन के सुरक्षा मानकों तक नहीं पहुंचता, तब तक इसका उपयोग जोखिम भरा हो सकता है। फिर भी ट्रंप ने इसे अंतरिम समाधान के रूप में अपनाने की बात कही है ताकि सरकारी खर्च में कटौती हो सके।
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