नई दिल्ली:
1984 में जब भारत की पहली अंतरिक्ष उड़ान के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूछा था, “ऊपर से भारत कैसा दिखता है?” — तब विंग कमांडर राकेश शर्मा का जवाब बन गया था राष्ट्र की आत्मा की आवाज:
“सारे जहां से अच्छा।”
अब, ठीक 41 वर्षों बाद, इतिहास ने खुद को दोहराया — इस बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से एक और भारतीय वायुसेना अधिकारी की आवाज आई, जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया।
“जब पहली बार भारत को देखा, भारत सच में बहुत भव्य दिखता है।“
— बोले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल, जून 2025 में।
1984: जब भारत ने पहली बार अंतरिक्ष को छुआ
सोवियत संघ के “साल्युट-7” मिशन के तहत भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने जब अंतरिक्ष से भारत की छवि देखी, वह केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं थी — वह एक सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और भावनात्मक क्षण था।
जब इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा, “ऊपर से भारत कैसा दिखता है?” तो उनका जवाब आया,
“जी, मैं बिना झिझक के कह सकता हूं — सारे जहां से अच्छा।”
यह जवाब उस वक्त देश के हर कोने में गूंज उठा, और आज भी स्कूल की पाठ्यपुस्तकों, वैज्ञानिक सम्मेलनों और प्रेरणादायक कहानियों का हिस्सा है।
2025: नया युग, नई उड़ान
अब भारत न केवल अंतरिक्ष में ‘उपस्थित’ है, बल्कि अपना खुद का मानव अंतरिक्ष मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा मिशन की ओर बढ़ रहा है।
इस बार, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल — एक 39 वर्षीय फाइटर पायलट — भारत के पहले नागरिक बने जिन्होंने ISS तक की यात्रा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक वीडियो कॉल के दौरान उनका संवाद यादगार बन गया।
“यहाँ से सीमाएँ नहीं दिखतीं, सिर्फ एक पृथ्वी दिखती है। भारत बहुत विशाल लगता है, मानचित्र से भी बड़ा।” — शुभांशु शुक्ला ने कहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया:
“आज आप भले ही भारत से सबसे दूर हैं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के दिलों के सबसे करीब हैं।“
अंतरिक्ष में हलवा और हास्य
दोनों के बीच बातचीत में गंभीर विज्ञान के साथ हल्के-फुल्के लम्हे भी शामिल रहे — शुक्ला ने बताया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रू मेंबर्स के साथ गाजर और मूंग दाल का हलवा शेयर किया।
“सबको बहुत पसंद आया। अब सब भारत आने की बात कर रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में सोना या पानी पीना तक एक चुनौती बन जाता है। बातचीत के दौरान उन्हें खुद को “तैरने से रोकने” के लिए पैरों को सीट से बांधना पड़ा।
एक राष्ट्र की सामूहिक छलांग
बातचीत के अंत में, शुक्ला ने कहा:
“यह मेरी नहीं, हमारे देश की सामूहिक उपलब्धि है।”
और अंत में —
“भारत माता की जय।”
इस क्षण में, अंतरिक्ष की गहराई में तैरते हुए, शुभांशु शुक्ला के बगल में तिरंगा लहरा रहा है — और एक नया युग आकार ले रहा है।
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