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नक्सलियों के पुराने हथकंडे फिर शुरू: IED और छोटे ग्रुप से हमला, अमित शाह बोले- जवान निर्णायक मोर्चे के लिए तैयार रहें

छत्तीसगढ़।
बस्तर में नक्सलवाद अब खत्म होने की कगार पर है, लेकिन नक्सली अब पुराने पैंतरों पर लौट आए हैं। वे अब सीधे मुठभेड़ करने की बजाय छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर हमला कर रहे हैं और आईईडी (बारूदी सुरंग) से फोर्स को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

बीजापुर में बढ़ रही वारदातें

बीते कुछ दिनों में नक्सलियों ने बीजापुर में कई घटनाओं को अंजाम दिया है:

  • 8 जून: पूवर्ती में मुखबिरी के शक में एक ग्रामीण की हत्या

  • 9 जून: कोंटा में आईईडी ब्लास्ट में एएसपी आकाश राव शहीद

  • 17 जून: पोद्दाकोरमा गांव में आत्मसमर्पित नक्सली समेत 3 की हत्या

  • 22 जून: सेंड्राबोर गांव में दो ग्रामीणों की हत्या

  • 23 जून: पदेड़ा गांव में एक आरक्षक पर जानलेवा हमला

नक्सली अब 5–7 के ग्रुप में आकर वारदात करते हैं और फिर फरार हो जाते हैं। उनका मकसद है डर और दहशत का माहौल बनाना ताकि गांवों में उनकी मौजूदगी महसूस हो।

शाह ने जवानों से की खास मुलाकात

गृहमंत्री अमित शाह ने नया रायपुर में बस्तर के 70 जवानों से मुलाकात की। ये सभी जवान डीआरजी, कोबरा, एसटीएफ और बस्तर फाइटर्स जैसे यूनिट से हैं और नक्सल ऑपरेशन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। शाह ने कहा:

  • आने वाले छह महीने निर्णायक होंगे।

  • जवान पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ें

  • “मैं भरोसे से कहता हूं कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा।”

फोर्स अलर्ट पर, SOP सख्ती से लागू

कोंटा में एएसपी की शहादत के बाद फोर्स को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि:

  • बिना पूरी टीम के जवान कैंप से बाहर ना निकलें।

  • सभी को SOP का पालन करना जरूरी है।

  • सर्चिंग के लिए लगातार एडवाइजरी जारी हो रही है।

गांवों में फिर डर का माहौल

बीजापुर जिले के कई गांवों में दहशत है। लोग शाम को घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। खासकर कैंप के पास बसे गांव टारगेट बन रहे हैं। नक्सली यहां मुखबिरी के शक में हत्याएं कर रहे हैं।

IED अब भी सबसे बड़ा खतरा

बस्तर की कई सड़कों के नीचे अब भी नक्सलियों ने IED दबा रखी है

  • जनवरी 2024 में कटरू में IED धमाके में 8 जवान शहीद हुए थे।

  • भोपालपट्टनम के पास भी एक बड़ा ब्लास्ट हुआ, लेकिन जवान बाल-बाल बचे

  • फोर्स सिर्फ 3 मीटर गहराई तक की IED ही खोज पा रही है।

  • इससे नीचे की IED डिटेक्ट करने के उपकरण नहीं हैं


निष्कर्ष:

नक्सली अब खुले तौर पर मुठभेड़ करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए वे छोटे ग्रुप, IED और डर फैलाने की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं सरकार और सुरक्षा बल अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी में हैं। आने वाले 6 महीने नक्सलवाद के अंत के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

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