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नगरनार स्टील प्लांट में विनिवेशीकरण का विरोध
बस्तर स्थित नगरनार स्टील प्लांट में विनिवेशीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह जिंदल स्टील और आर्सेलर मित्तल के 13 अधिकारी, स्टेट बैंक के अफसरों के साथ पांच गाड़ियों में प्लांट पहुंचे। इन अधिकारियों ने सुबह 8 बजे से प्लांट का निरीक्षण किया।
श्रमिक यूनियनों ने किया विरोध
जैसे ही श्रमिक यूनियनों को इस दौरे की जानकारी मिली, सैकड़ों श्रमिक प्लांट के कॉन्फ्रेंस हॉल के बाहर इकट्ठा होकर नारेबाजी करने लगे। अधिकारियों ने बताया कि यह दौरा केवल एचआर क्वाइल की जांच के लिए था, लेकिन यूनियनों ने इसे विनिवेशीकरण से जोड़कर विरोध किया।
जय झाड़ेश्वर समिति ने जताया आक्रोश
प्लांट में परिवहन का काम कर रही जय झाड़ेश्वर समिति ने भी दौरे का कड़ा विरोध किया। समिति ने कहा कि यह प्लांट बस्तर के हित के लिए है और इसका विनिवेशीकरण श्रमिकों और भू प्रभावितों के लिए हानिकारक होगा।
विवाद और सवाल
- प्लांट में कंपनियों को अचानक दाखिल किया गया, जिससे श्रमिकों को शक हुआ।
- कंपनियां अगर केवल एचआर क्वाइल के लिए आई थीं, तो स्टेट बैंक के अफसरों को क्यों लाया गया?
- श्रमिक संगठनों का कहना है कि एसबीआई की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि यह दौरा विनिवेशीकरण से जुड़ा था।
श्रमिक यूनियनों का आरोप
संयुक्त इस्पात मजदूर संगठन के अध्यक्ष संतराम सेठिया ने कहा कि प्लांट के विनिवेशीकरण की तैयारी हो चुकी है। प्रबंधन सब कुछ जानते हुए भी सच छिपा रहा है। अब बस्तर के लोगों को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा।
आगे की चेतावनी
श्रमिक यूनियनों ने प्लांट प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह के दौरे बिना सूचना के नहीं होने चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो इसका जोरदार विरोध होगा, और इसके लिए प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
यूनियनों और श्रमिकों ने यह साफ कर दिया है कि वे विनिवेशीकरण के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।
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