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“नदी-जंगल की बलि पर विकास?” 12 हजार करोड़ की यूनिट पर उठे सवाल, दुर्लभ वन्यजीवों पर खतरे का दावा
Satpura Thermal Power Station से जुड़ी एक बड़ी परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की नई यूनिट निर्माण योजना पर पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए नदी, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी की जा रही है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का आरोप है that परियोजना के प्रभाव को लेकर मैनेजमेंट ने कई अहम तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि मैनेजमेंट की ओर से “6 बड़े झूठ” बोले गए, जिनमें जंगल क्षेत्र, पानी के उपयोग और वन्यजीवों पर पड़ने वाले असर से जुड़ी जानकारी शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस इलाके में कई दुर्लभ वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं। यदि बड़े स्तर पर निर्माण और पेड़ों की कटाई होती है, तो इनके प्राकृतिक आवास पर गंभीर असर पड़ सकता है। स्थानीय संगठनों ने परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दूसरी ओर परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सभी जरूरी पर्यावरण मानकों का पालन किया जा रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की कोशिश होगी।
बड़ी बातें
- Satpura Thermal Power Station की 12 हजार करोड़ की यूनिट पर विवाद
- नदी और जंगल को नुकसान पहुंचाने के आरोप
- दुर्लभ वन्यजीवों के आवास पर खतरे की आशंका
- मैनेजमेंट पर “6 झूठ” बोलने का दावा
- पर्यावरण मंजूरी की जांच की मांग तेज
अब यह मामला विकास बनाम पर्यावरण की बहस को फिर से केंद्र में ले आया है।
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