नागौर जिले में परंपरागत खेती की जगह अब उद्यानिकी और आधुनिक कृषि ने ले ली है। बदलते मौसम, घटते जलस्तर और बढ़ती लागत के बीच किसान नए तरीकों से खेती कर अधिक उत्पादन और आय प्राप्त कर रहे हैं।
उद्यानिकी और पॉली हाउस तकनीक
जिले में अनार, खजूर, बेर, पपीता जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। ये फसलें कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं। पॉली हाउस तकनीक से सीमित जमीन और पानी में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी और रंगीन फूल उगाए जा रहे हैं। नियंत्रित तापमान और नमी से फसलें मौसम की मार से सुरक्षित रहती हैं और गुणवत्ता भी अच्छी होती है।
सरकारी योजनाओं का योगदान
सरकारी योजनाएं जैसे राष्ट्रीय बागवानी मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, सूक्ष्म सिंचाई योजना और पॉली हाउस अनुदान किसानों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रही हैं। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से पानी की बचत और उत्पादन में वृद्धि हो रही है।
पढ़े-लिखे युवा बना रहे खेती को आधुनिक
आईआईटी और कृषि स्नातक युवा पारंपरिक नौकरी छोड़कर खेती में आ रहे हैं। वे मोबाइल ऐप, मौसम पूर्वानुमान, ऑनलाइन मार्केटिंग और आधुनिक मशीनों का उपयोग कर खेती को लाभकारी बना रहे हैं। इससे गांवों में नई रोजगार संभावनाएं भी पैदा हो रही हैं।
जिले में सफलता की कहानी
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कालड़ी का अनार: अशोक जांगू ने 40 बीघा में 5,000 अनार के पौधे लगाए, जिससे हर साल 2,000 क्विंटल पैदावार होती है। पूरी तरह ऑर्गेनिक अनार की मांग विदेशों तक है।
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टांकला का बगीचा: लिखमाराम मेघवाल ने 28 प्रकार के फल जैसे अमरूद, अनार, अंजीर, बेर, चीकू लगाए। ऑर्गेनिक बागवानी से अमरूद 100 रुपये प्रति किलो बिकता है।
निष्कर्ष
नागौर जिले में तकनीकी नवाचार और सरकारी सहयोग से किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इससे उनकी आय बढ़ रही है और जिले की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
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