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बिहार के मधुबनी जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है। इस गिरोह के तार नेपाल, चीन, म्यांमार, कंबोडिया समेत कई देशों से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने मुख्य सरगना समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
मधुबनी से चलता था ठगी का कंट्रोल रूम
जांच में सामने आया कि मधुबनी शहर के तिरहुत कॉलोनी इलाके के एक मकान से यह पूरा साइबर फ्रॉड ऑपरेशन चलाया जा रहा था। यहां सिम बॉक्स लगाकर विदेश से आने वाली कॉल्स को भारतीय नेटवर्क में बदला जाता था, ताकि ठगी की कॉल भारत से आती हुई लगे और पकड़ में न आए।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 7 सिम बॉक्स, 136 मोबाइल फोन, 136 सिम कार्ड, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, केबल और करीब 1.68 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
नेपाल में ली गई थी साइबर ठगी की ट्रेनिंग
मुख्य आरोपी मनजीत सिंह ने पूछताछ में बताया कि वह कुछ महीने पहले नेपाल के काठमांडू गया था। वहां उसे सिम बॉक्स के जरिए साइबर ठगी करने की पूरी ट्रेनिंग दी गई। उसे यह भी सिखाया गया कि विदेशी सर्वर से कॉल कैसे रूट की जाए, ताकि पुलिस आसानी से ट्रेस न कर सके।
महंगे दामों पर खरीदे जाते थे सिम कार्ड
इस गिरोह में स्थानीय सिम बेचने वालों की भी भूमिका सामने आई है। लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड 700 से 1000 रुपये में खरीदे जाते थे और इन्हें सिम बॉक्स में लगाकर ठगी की कॉल्स की जाती थीं।
युवाओं को विदेश में बंधक बनाकर कराया जाता था फ्रॉड
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह चीन, म्यांमार, कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम में चल रहे साइबर स्कैम ठिकानों से जुड़ा हुआ है। युवाओं को नौकरी का झांसा देकर वहां बुलाया जाता था, फिर उनके पासपोर्ट जब्त कर उन्हें जबरन साइबर ठगी में लगाया जाता था।
कई तरह की ठगी में शामिल था नेटवर्क
एसपी योगेंद्र कुमार के अनुसार यह गिरोह फर्जी बैंक कॉल, KYC अपडेट, साइबर अरेस्ट, क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट और अन्य ऑनलाइन ठगी में शामिल था। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
कितने लोग हुए ठगी का शिकार, जांच जारी
अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को ठगा या कितने युवाओं को विदेश में बंधक बनाया गया। जब्त किए गए मोबाइल और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच के बाद पूरी सच्चाई सामने आएगी। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
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