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बजट सत्र में राशन और ई-केवाईसी पर बहस, ‘विदेश’ वाले बयान से गरमाया सदन

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में राशन कार्ड और ई-केवाईसी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। परबतसर से कांग्रेस विधायक रामनिवास गावड़िया और खाद्य मंत्री सुमित गोदारा के बीच इस विषय पर तीखी बहस हुई।

ई-केवाईसी की तकनीकी समस्या पर सवाल

विधायक रामनिवास गावड़िया ने कहा कि ई-केवाईसी की तकनीकी खामियों के कारण कई गरीब परिवारों का राशन बंद हो गया है। उन्होंने बताया कि जब कोई बच्चा 4 साल 1 महीने का होता है, तो रिकॉर्ड में उसे 5 साल का दिखाया जाता है। लेकिन 5 साल से पहले आधार अपडेट नहीं होता। आधार और राशन कार्ड के डेटा में अंतर होने से बच्चे की ई-केवाईसी नहीं हो पाती। एक सदस्य की केवाईसी न होने पर पूरे परिवार का राशन रुक जाता है। उनके अनुसार, हर डीलर के पास ऐसे कई परिवार परेशान हैं।

मंत्री का जवाब और विवाद

खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि राज्य में 75 लाख नए नाम जोड़े गए हैं और 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए छूट दी जा रही है। लेकिन विवाद तब बढ़ा जब उन्होंने कहा कि जो लोग विदेश में कमाने गए हैं, क्या उन्हें भी गेहूं दिया जाए? योजना गरीबों के लिए है, सक्षम लोगों के लिए नहीं।

गावड़िया का पलटवार

मंत्री के बयान पर गावड़िया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गांव का गरीब और किसान का बेटा ही मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाता है। वे वहां मौज करने नहीं, बल्कि परिवार चलाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि विदेश जाने वाले सभी लोग अमीर नहीं होते, इसलिए उन्हें राशन से वंचित करना गलत है।

प्रदेश में बढ़ रही परेशानी

राज्य में ई-केवाईसी की अंतिम तिथि करीब आने से कई लोगों को दिक्कत हो रही है। बायोमैट्रिक समस्या और मोबाइल नंबर लिंक न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार राशन नहीं ले पा रहे हैं। विपक्ष ने मांग की है कि बाहर काम करने वालों के लिए ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ के तहत प्रक्रिया को और आसान बनाया जाए, ताकि उनके परिवार को परेशानी न हो।

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