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परमाणु बम की शुरुआत और ‘मृत्यु का दूत’ कहे जाने वाले वैज्ञानिक का भगवद गीता से संबंध

ईरान-इजराइल युद्ध के दौरान परमाणु खतरे की चर्चा ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान उस पहले एटम बम की ओर खींचा, जिसने इतिहास की दिशा ही बदल दी थी। जब अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स से ईरान के गुप्त परमाणु ठिकानों पर हमले किए, तब यह सवाल भी ज़रूरी हो गया—दुनिया में पहला परमाणु बम कब और कैसे बना था? उसका पहला परीक्षण कहां हुआ? और जिस वैज्ञानिक को इसका जनक कहा जाता है, उसका भगवद गीता से क्या संबंध था?


एटम बम का आरंभ: मैनहट्टन प्रोजेक्ट

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में अमेरिका ने मैनहट्टन प्रोजेक्ट नाम से एक गुप्त सैन्य परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य नाजी जर्मनी से पहले परमाणु हथियार बनाना था। इस ऐतिहासिक परियोजना का नेतृत्व जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने किया, जिन्हें बाद में “एटम बम का जनक” कहा गया।


ट्रिनिटी टेस्ट: पहली बार परमाणु विस्फोट

16 जुलाई 1945 को अमेरिका के न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में “ट्रिनिटी” नाम से पहला परमाणु परीक्षण किया गया। इस विस्फोट में इतनी ऊर्जा निकली थी कि यह लगभग 20,000 टन टीएनटी के बराबर था। इसकी चमक और लहरों ने रेगिस्तान को कुछ देर के लिए दिन जैसा बना दिया।


जब ओपेनहाइमर ने भगवद गीता का किया उल्लेख

इस विस्फोट को देखकर ओपेनहाइमर ने जो शब्द कहे, वो आज भी इतिहास में गूंजते हैं:
“Now I am become Death, the destroyer of worlds.”
ये पंक्ति भगवद गीता के अध्याय 11, श्लोक 32 से ली गई है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं:
“कालोऽस्मि लोकक्षयकृत् प्रवृद्धो…”
(मैं काल हूं, संसार का नाश करने वाला…)

ओपेनहाइमर संस्कृत जानते थे और भारतीय दर्शन से गहराई से जुड़े हुए थे।


युद्ध में पहला प्रयोग: हिरोशिमा और नागासाकी

6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर ‘लिटिल बॉय’ नामक यूरेनियम बम गिराया, जिसमें 80,000 से अधिक लोग तुरंत मारे गए।
9 अगस्त को नागासाकी पर ‘फैट मैन’ नाम का प्लूटोनियम बम गिराया गया, जिसने 40,000 से अधिक जानें लीं। इसके बाद जापान ने 15 अगस्त को आत्मसमर्पण कर दिया।


क्यों खतरनाक है परमाणु बम?

परमाणु बम में नाभिकीय विखंडन या संलयन की प्रक्रिया से विस्फोट होता है, जिससे कुछ ग्राम पदार्थ से लाखों टन टीएनटी जितनी ऊर्जा निकलती है।
इससे निकलने वाली गर्मी, रेडिएशन और विद्युत चुंबकीय तरंगें न केवल तत्काल मृत्यु लाती हैं, बल्कि वर्षों तक बीमारियां और तबाही फैलाती हैं।


दुनिया में परमाणु बमों का हाल (2025 तक)

फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में फिलहाल लगभग 12,331 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से अधिकांश रूस और अमेरिका के पास हैं:

देश अनुमानित हथियार
रूस 5,449
अमेरिका 5,277
चीन 600
फ्रांस 290
यूनाइटेड किंगडम 225
भारत 180
पाकिस्तान 170
इजरायल 90
उत्तर कोरिया 50

निष्कर्ष: इतिहास से सबक और भविष्य की चेतावनी

1980 के दशक में दुनिया में 70,000 से ज्यादा परमाणु बम थे। लेकिन बाद में हथियारों की होड़ में कमी आई और अब यह संख्या घटकर लगभग 12,000 रह गई है।
परमाणु शक्ति का विज्ञान मानवता के लिए वरदान भी हो सकता है और विनाश का कारण भी।
और शायद इसीलिए जब ओपेनहाइमर ने ‘काल’ का रूप देखा, उन्होंने भारतीय दर्शन में ही उसके लिए शब्द खोजे।

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