Breaking News

पहले दिन स्कूलों की बदहाल हालत: कहीं बच्चे नहीं आए, कहीं बैठने की भी जगह नहीं, कई स्कूलों में ताले लगे मिले

मुरैना – जिले के सरकारी स्कूलों में सोमवार से नया सत्र शुरू हुआ, लेकिन स्कूलों की हालत पहले ही दिन बेहद खराब दिखी। कई स्कूलों में न बच्चे पहुंचे और न ही स्टाफ दिखाई दिया। कुछ स्कूलों में तो ताले लटके मिले, वहीं कुछ स्कूलों में जर्जर इमारतें तोड़ दी गईं, लेकिन नई बिल्डिंग बन ही नहीं पाई। बच्चों के बैठने की जगह भी नहीं थी और कई जगह मध्यान्ह भोजन तक नहीं पहुंचा।

शिकारपुर स्कूल में प्रभारी बना रहे थे बिल्डिंग

शासकीय प्राथमिक विद्यालय शिकारपुर में स्कूल खुला हुआ था, लेकिन न कोई शिक्षक था और न ही कोई बच्चा। संस्था प्रभारी खुद बिल्डिंग निर्माण के काम में लगे हुए थे। यह काम स्कूल के छुट्टी के समय किया जा सकता था, लेकिन स्कूल खुलने के बाद भी निर्माण कराया जा रहा है।

तुलसी कॉलोनी स्कूल: एक भी बच्चा नहीं आया

शासकीय कन्या शाला तुलसी कॉलोनी में 97 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन एक भी बच्चा नहीं आया। चार सदस्यीय स्टाफ मौजूद था, लेकिन उनके पास बैठने का एक ही कमरा था, जिसमें मध्यान्ह भोजन के बर्तन, किताबें और टूटा-फूटा फर्नीचर भरा हुआ था। यहां भी मध्यान्ह भोजन नहीं आया।

पीपरीपुरा स्कूल: गंदगी और पानी भरा

पीपरीपुरा स्कूल में सिर्फ आठ बच्चे आए। स्कूल के दरवाजे के पास पानी जमा था, जिसमें मच्छर पनप रहे थे। स्टाफ और बच्चे पत्थर रखकर स्कूल में दाखिल हो रहे थे, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

सूबालाल का पुरा स्कूल: स्कूल में लटका मिला ताला

यहां दोपहर 1:08 बजे स्कूल में ताला लटका मिला। परिसर में नाले का गंदा पानी भरा था। मोहल्लेवालों ने बताया कि टीचर रोज दस बजे आ जाती हैं, लेकिन आज कोई नहीं आया।

एसएएफ लाइन स्कूल: कमरे कम, बच्चे ज्यादा

एसएएफ लाइन के स्कूल में 160 बच्चों में से सिर्फ 9 ही आए। यहां स्कूल की पुरानी बिल्डिंग गिरा दी गई, लेकिन नई बनी नहीं। सिर्फ तीन कमरों में दो पालियों में लगभग 340 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

जिम्मेदारों का बयान

जिला परियोजना समन्वयक हरीश तिवारी ने कहा, “जिन स्कूलों की बिल्डिंगें तोड़ दी गई हैं, उनके लिए प्रस्ताव भेज दिए गए हैं। ताले लगे स्कूलों का मामला गंभीर है। मैं खुद निरीक्षण करूंगा और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”

निष्कर्ष: पहले दिन के स्कूल प्रवेशोत्सव में बदइंतजामी और लापरवाही साफ दिखी। कई स्कूलों में तो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ना तय है।

About admin

Check Also

निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 गाड़ियां, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने वाहन कम करने से किया इनकार!

बिहार में मंत्री के काफिले पर सियासत तेज, निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?