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पाकिस्तान के ‘इस्लामिक बम साइट’ पर इंडिया-इजरायल की अटैक प्लानिंग, इंदिरा ने क्यों कहा था- NO

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पाकिस्तान के ‘इस्लामिक बम साइट’ पर इंडिया-इजरायल की अटैक प्लानिंग? इंदिरा गांधी ने क्यों कहा था— NO

भारत, इजरायल और पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी एक पुरानी लेकिन बेहद संवेदनशील कहानी फिर चर्चा में है। दावा किया जाता है कि पाकिस्तान की उस न्यूक्लियर साइट पर हमला करने की रणनीति पर कभी गंभीर विचार हुआ था, जिसे दुनिया में पाकिस्तान के ‘इस्लामिक बम’ प्रोजेक्ट से जोड़ा जाता था। लेकिन उस वक्त भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस रास्ते पर आगे बढ़ने से इनकार कर दिया था।

रिपोर्ट्स और पुराने दावों के मुताबिक, पाकिस्तान तेजी से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा था। भारत को डर था कि अगर पाकिस्तान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। इसी दौर में इजरायल की भूमिका और संभावित सहयोग को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं।

कहा जाता है कि पाकिस्तान की न्यूक्लियर साइट पर प्री-एम्प्टिव अटैक यानी पहले हमला करने की रणनीति पर विचार हुआ था। इजरायल पहले भी इराक के परमाणु रिएक्टर पर हमला कर चुका था, इसलिए ऐसी चर्चाओं को उस समय गंभीरता से देखा गया। लेकिन भारत के लिए यह फैसला आसान नहीं था।

इंदिरा गांधी के सामने सबसे बड़ा सवाल था—क्या इस हमले से पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम रुकता, या फिर पूरा क्षेत्र बड़े युद्ध में धकेल दिया जाता? अगर भारत किसी न्यूक्लियर साइट पर हमला करता, तो पाकिस्तान की तरफ से सैन्य जवाबी कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिका-चीन जैसे देशों की प्रतिक्रिया का बड़ा खतरा था।

इसी वजह से माना जाता है कि इंदिरा गांधी ने इस तरह के ऑपरेशन को हरी झंडी नहीं दी। उनका फैसला सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक संतुलन से जुड़ा था। भारत उस समय खुले युद्ध या परमाणु तनाव को बढ़ाने के बजाय स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा था।

आज जब भारत-पाकिस्तान, इजरायल और परमाणु सुरक्षा की बातें फिर चर्चा में आती हैं, तो यह पुराना अध्याय याद दिलाता है कि बड़े फैसले सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि दूरदृष्टि और परिणामों की समझ से लिए जाते हैं।

channel_009 की नजर: पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर भारत-इजरायल अटैक प्लानिंग की चर्चा इतिहास का बेहद संवेदनशील हिस्सा है। इंदिरा गांधी का ‘NO’ यह दिखाता है कि कभी-कभी हमला न करना भी सबसे बड़ा रणनीतिक फैसला हो सकता है।

संपादक: Neeraj Parwani

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