ऑपरेशन सिंदूर के बाद ₹10 लाख करोड़ की डिफेंस डील, 14 महीने में बदला हथियार खरीद का पैटर्न; लंबी जंग की तैयारी के संकेत
channel_009 | Defence News
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा तैयारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 14 महीनों में करीब ₹10 लाख करोड़ की डिफेंस डील से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। हथियारों की खरीद का पैटर्न भी अब पहले से अलग दिखाई दे रहा है।
पहले जहां बड़े प्लेटफॉर्म और लंबी अवधि वाली खरीद पर ज्यादा जोर रहता था, वहीं अब सेना की तत्काल जरूरतों, गोला-बारूद के बड़े भंडार, ड्रोन, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और निगरानी तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस बदलाव को केवल सामान्य आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले संभावित संघर्ष की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ हथियार खरीदना काफी नहीं होता। उनके लिए लगातार गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत व्यवस्था और तेज सप्लाई चेन भी जरूरी होती है।
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव के बाद सेना का फोकस ऐसे हथियारों पर बढ़ा बताया जा रहा है, जिन्हें कम समय में तैनात किया जा सके और जरूरत पड़ने पर लगातार इस्तेमाल किया जा सके। स्वदेशी कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर भी आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे सकते हैं।
डिफेंस खरीद के इस बदले पैटर्न से साफ संकेत मिलता है कि भारत अब सीमित अवधि के ऑपरेशन के साथ-साथ लंबे सैन्य तनाव की स्थिति के लिए भी अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। हालांकि ₹10 लाख करोड़ के पूरे आंकड़े और सभी सौदों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी जरूरी है।
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