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पूर्व मंत्री जाट और एडीजी आनंद के भाई पर चोरी के आरोप, जांच सीबीआई को सौंपी

जयपुर: हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री रामलाल जाट और एडीजी आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव समेत 5 लोगों पर लगे चोरी के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है। यह आदेश भीलवाड़ा के करेड़ा थाने में दर्ज दो मामलों के लिए दिया गया है।

हाईकोर्ट ने पुलिस पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने कहा कि जब मामले में बड़े राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं, तो पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। न्यायाधीश फरजंद अली ने कहा कि सीबीआई के पास ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर जैसी आधुनिक तकनीकें हैं, जिससे मामले की गहरी जांच संभव होगी।

क्या है मामला?

परमेश्वर रामलाल जोशी नाम के व्यक्ति ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनकी खान से खनन मशीनें चोरी हो गईं, लेकिन भीलवाड़ा पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस निष्क्रिय बनी रही।

सीबीआई को जांच के आदेश

कोर्ट ने सीबीआई निदेशक को निर्देश दिया कि वे वरिष्ठ अधिकारी को जांच सौंपें और निष्पक्ष व त्वरित जांच सुनिश्चित करें। भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक को सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट की नाराजगी

हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 7 महीने बाद भी पुलिस अधिकारी एडीजी के भाई का नाम आरोपी के रूप में मानने को तैयार नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि एसओजी, एसीबी और सीआईडी जैसी एजेंसियां भी पुलिस महानिदेशक के अधीन होने के कारण निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती थीं।

क्या हैं दो आपराधिक मामले?

  1. पहला मामला: आरोप है कि 2018 से 2021 के बीच अरविंद श्रीवास्तव समेत 5 लोगों ने षड्यंत्र रचकर जोशी की खान से एक्सकेवेटर मशीन, डंपर, डीजल एयर कंप्रेसर और अन्य मशीनें चोरी कर उदयपुर और केरल में बेच दीं।
  2. दूसरा मामला: इसमें पूर्व मंत्री रामलाल जाट सहित 6 लोगों पर मशीनरी और वाहन चोरी करने का आरोप है। जांच के दौरान एक आरोपी ने फर्जी किराए का समझौता दिखाकर केस को कमजोर करने की कोशिश की, और पुलिस अधिकारियों ने नकारात्मक रिपोर्ट दाखिल कर दी।

एक आरोपी का मूर्ति तस्करी से कनेक्शन

इस मामले में शामिल एक आरोपी पर 2003 में अंतरराष्ट्रीय मूर्ति तस्करी में संलिप्त होने का भी शक है। जयपुर पुलिस ने तब इस मामले का खुलासा किया था, लेकिन न्यायालय ने जांच में खामियों के कारण मुख्य आरोपी वामन नारायण घीया की सजा रद्द कर दी थी।

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