प्रियंका गांधी ने लोकसभा में संविधान पर चर्चा करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने पहले भाषण में प्रियंका गांधी ने जातीय जनगणना, अदाणी मुद्दे और देश की एकता जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने पंडित नेहरू का जिक्र करके सत्ता पक्ष को घेरा और पूछा कि वे अतीत को कब तक कोसते रहेंगे।
प्रियंका गांधी ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हजारों साल पुरानी बहस और संवाद की परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने इस संविधान की अहमियत को बताया और कहा कि यह हर नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह सरकार बना सकता है और सरकार बदल सकता है।
प्रियंका ने उन्नाव और हाथरस जैसी घटनाओं का जिक्र किया और बताया कि संविधान ने महिलाओं और पीड़ितों को न्याय की ताकत दी। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान न्याय, एकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सुरक्षा कवच है, और सत्ता पक्ष इन अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष बड़े-बड़े वादे करता है, लेकिन वास्तव में एक ही व्यक्ति को सारे संसाधन दिए जा रहे हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि अमीर और अमीर हो रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब हो रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि आज देश में भय का माहौल बनाया जा रहा है, लेकिन यह देश कभी भय से नहीं बना। यह देश साहस और संघर्ष से बना है, और यह देश सत्य की आवाज उठाएगा।
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