बीजिंग: चीन की जनसंख्या संकट और गिरती जन्म दर के बीच एक नई रिसर्च में अहम सुझाव दिया गया है—बच्चों की देखभाल में पुरुषों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए उन्हें भी आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। यह शोध फुदान यूनिवर्सिटी और हांगकांग यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा किया गया है, जो पारिवारिक ज़िम्मेदारियों में लैंगिक संतुलन के महत्व को रेखांकित करता है।
महिलाओं पर भार घटेगा, जनसंख्या दर में स्थिरता की उम्मीद
रिसर्च में बताया गया है कि यदि केवल महिलाओं को ही माता-पिता बनने पर सब्सिडी दी जाती है, तो इससे पारंपरिक भूमिकाएं और मजबूत होती हैं। इसके विपरीत, यदि पुरुषों को भी वित्तीय सहायता मिले, तो वे बच्चों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। इससे महिलाओं का मानसिक और शारीरिक बोझ घटेगा और वे परिवार बढ़ाने के लिए अधिक प्रेरित हो सकेंगी।
चीन की जनसंख्या तीन साल से लगातार घट रही
चीन की कुल जनसंख्या 2024 में घटकर 1.4083 अरब रह गई है, जो एक साल में करीब 1.39 मिलियन की कमी को दर्शाता है। प्रजनन दर भी गिरकर 1.1 प्रति महिला तक पहुँच चुकी है, जबकि स्थिर जनसंख्या के लिए यह दर 2.1 होनी चाहिए।
रूढ़िवादी सोच और कार्यस्थल संतुलन की चुनौती
इस अध्ययन में 23 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। निष्कर्ष यह निकला कि कई पूर्वी एशियाई देशों, विशेषकर चीन, में बच्चों की देखभाल की प्राथमिक ज़िम्मेदारी अब भी महिलाओं पर है। जब महिलाएं कामकाजी होती हैं, तो पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कठिन हो जाता है, जिससे जन्म दर प्रभावित होती है।
‘मेल चाइल्डकेयर सब्सिडी’ की सिफारिश
शोधकर्ताओं का मानना है कि पुरुषों को चाइल्डकेयर सब्सिडी देना समय की मांग है। इससे पारिवारिक ज़िम्मेदारियों का संतुलन बनेगा और रूढ़िवादी सामाजिक धारणाओं में सकारात्मक बदलाव आएगा। उदाहरण के लिए, सेवा क्षेत्र में 1% वृद्धि होने पर जन्म दर में 0.1 की गिरावट देखी गई है — यह प्रभाव उन समाजों में ज़्यादा है जहाँ लैंगिक भूमिकाएं परंपरागत हैं।
सरकार ने उठाए कुछ शुरुआती कदम
चीन के सिचुआन प्रांत में पितृत्व अवकाश को 20 से बढ़ाकर 30 दिन करने की योजना बनाई गई है। वहीं मातृत्व अवकाश को 90 से बढ़ाकर 150 दिन करने का प्रस्ताव है। विवाह से संबंधित छुट्टियों और स्वास्थ्य जांच के बाद अतिरिक्त अवकाश जैसे उपायों की भी शुरुआत हो चुकी है।
राष्ट्रीय स्तर पर असर कब दिखेगा?
अब तक छुट्टियाँ और नकद प्रोत्साहन जैसी योजनाओं से कुछ स्थानीय सुधार ज़रूर हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं दिखा है। रिसर्च का निष्कर्ष साफ है—समान वित्तीय सहयोग और जिम्मेदारियों के वितरण के बिना जनसंख्या संकट पर काबू पाना मुश्किल है।
निष्कर्ष: यदि चीन जैसे देश पुरुषों को भी बच्चों की परवरिश में सहभागी बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करें, तो यह न केवल समाज में लैंगिक संतुलन बनाएगा, बल्कि दीर्घकालिक रूप से जनसंख्या स्थिरता की ओर भी एक ठोस कदम होगा।
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