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नई दिल्ली। देश में बच्चों और किशोरों (16 साल से कम उम्र) के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण लगाने की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। विदेशों में बच्चों के सोशल मीडिया पर बैन और आर्थिक सर्वे में आई सिफारिशों के बाद भारत में भी कानून बनाने पर चर्चा तेज हो गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते असर को लेकर चिंता पहले से थी, लेकिन गाजियाबाद में सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की लत से जुड़ी एक दुखद घटना के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में भी बच्चों और युवाओं की मानसिक सेहत पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नकारात्मक प्रभाव की बात कही गई थी।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर उम्र सीमा तय करने और नियम बनाने पर हितधारकों से बातचीत की जा रही है। आईटी सचिव ने कहा है कि बच्चों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव को देखते हुए सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर रही है और सही समय पर फैसला लिया जाएगा।
आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
सरकार आयु सत्यापन, पैरेंटल कंट्रोल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। बच्चों के सोशल मीडिया पर पूरी तरह बैन को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन साफ है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा अब बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
सोशल मीडिया के असर का मूल्यांकन जरूरी
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सोशल मीडिया का समाज और सामाजिक विश्वास पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसका मूल्यांकन जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माता-पिता, स्कूल और समाज की भी इसमें अहम भूमिका है।
आर्थिक सर्वे में जताई गई चिंताएं
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ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों की पढ़ाई और उत्पादकता पर असर
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किशोरों में तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन बढ़ना
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एल्गोरिदम आधारित कंटेंट बच्चों को एक ही तरह की सोच में फंसा सकता है
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सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर उम्र आधारित सीमा लगाने की सिफारिश
विदेशों में क्या हो रहा है?
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ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन
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ब्रिटेन: ऑनलाइन सेफ्टी कानून के तहत प्लेटफॉर्म की सख्त जिम्मेदारी
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फ्रांस: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी
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स्पेन: बैन लगाने की तैयारी
भारत में राज्यों की पहल
गोवा और आंध्र प्रदेश सरकारों ने भी इस मुद्दे पर समितियां बनाई हैं, जो दूसरे देशों के कानूनों का अध्ययन कर रही हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं?
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14–16 साल के 82% बच्चे स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं
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9–17 साल के शहरी बच्चे रोजाना 3 से 6 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं
सरकार का मानना है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
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