ढाका: बांग्लादेश में ईद-उल-अजहा के मौके पर इस बार जानवरों की कुर्बानी का आंकड़ा 91 लाख के पार पहुंच गया। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस बार गायों और भैंसों की संख्या बकरियों और भेड़ों से अधिक रही, जो कि एक दिलचस्प ट्रेंड को दर्शाता है।
🐄 गायें आगे, बकरियां पीछे
बांग्लादेश के मत्स्य और पशुधन मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि इस बार कुल 47.5 लाख गाय और भैंसों की कुर्बानी दी गई, जबकि 44.3 लाख बकरियां और भेड़ें इस फेहरिस्त में शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त, कुछ ऊँट और अन्य पशुओं की भी बलि दी गई।
🛒 बिके नहीं 33 लाख से अधिक जानवर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस बार देश में जानवरों की आपूर्ति मांग से अधिक रही, जिसके चलते लगभग 33.10 लाख जानवर बिना बिके रह गए। इन जानवरों का उपयोग अब अन्य धार्मिक या सामाजिक अवसरों पर किया जाएगा।
📍 कहां हुई सबसे ज्यादा कुर्बानी?
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राजशाही डिवीजन में सबसे अधिक बलि दी गई — 23.24 लाख पशु
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ढाका रहा दूसरे स्थान पर — 21.85 लाख पशु
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चटगांव में — 17.53 लाख पशु
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रंगपुर — 9.64 लाख
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खुलना — 8.04 लाख
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बारिसाल — 4.70 लाख
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मयमनसिंह — 3.83 लाख
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सिलहट में सबसे कम — 3.19 लाख पशुओं की कुर्बानी हुई
🕌 ईद-उल-अजहा और कुर्बानी का महत्व
ईद-उल-अजहा या बकरीद, इस्लाम धर्म में त्याग और आस्था का प्रतीक पर्व है। यह पैगंबर इब्राहीम की उस ऐतिहासिक घटना की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह की इच्छा पर अपने बेटे की कुर्बानी देने का इरादा किया था। मुसलमान इस दिन तीन दिनों तक जानवरों की कुर्बानी करते हैं, और उसका मांस गरीबों, रिश्तेदारों और जरूरतमंदों में बांटा जाता है।
📌 निष्कर्ष:
बांग्लादेश में इस साल की बकरीद पर कुर्बानी का पैमाना न केवल धार्मिक उत्सव को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि देश में पशुधन की आपूर्ति मांग से कहीं ज्यादा है। यह आंकड़ा भविष्य के लिए पशु पालन और बाजार नियोजन के लिहाज से अहम संकेत देता है।
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