बांग्लादेश की राजनीति में एक और बड़ा झटका सामने आया है। प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना के चाचा शेख कबीर देश छोड़कर चुपचाप सिंगापुर भाग गए हैं। इस घटना ने वहां की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के वादों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
ईद के दौरान गुपचुप विदेश रवाना
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शेख कबीर ने बकरीद के मौके पर जब आम जनता त्योहार में व्यस्त थी, उसी दौरान हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिंगापुर के लिए उड़ान भरी।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोई कोशिश नहीं की।
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ये वही शेख कबीर हैं जिन पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हुए थे और जिनकी गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई थी।
हसीना सरकार में थे बेहद ताकतवर
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले शेख कबीर को उनके कार्यकाल में 23 महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली हुई थी।
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ये विभाग मुख्यतः वित्त और संसाधनों से संबंधित थे।
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हसीना शासन के दौरान कबीर को “पावर सेंटर” की तरह देखा जाता था।
लेकिन हसीना सरकार के पतन के बाद नई सरकार के आने पर एंटी-करप्शन जांच एजेंसियों ने कबीर पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
हालांकि इमिग्रेशन से जुड़े अधिकारियों से जब मीडिया ने सवाल किए तो उन्होंने या तो जवाब टाल दिए या जानकारी देने से इनकार कर दिया।
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अफसर यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे कि कबीर के पास विदेश यात्रा की अनुमति थी या नहीं।
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इससे यह आशंका और गहराई है कि अंदरखाने में राजनीतिक संरक्षण के चलते कबीर को भागने दिया गया।
यूनुस सरकार की साख पर असर
बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के मुख्य सलाहकार ने हाल ही में बयान दिया था कि पूर्व सरकार के समय किए गए भ्रष्टाचारियों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।
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लेकिन शेख कबीर की फरारी ने इस दावे पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
हसीना परिवार पहले से ही विदेश में
शेख हसीना के तख्तापलट के बाद उनके परिवार के कई सदस्य पहले ही विदेश में शरण ले चुके हैं।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, हसीना के बेटे और भतीजी ब्रिटेन में रह रहे हैं,
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जबकि खुद शेख हसीना भारत में अपनी बहन के साथ रह रही हैं।
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बांग्लादेश में हसीना और उनके परिवार के सदस्यों पर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और मानवाधिकार उल्लंघनों के केस चल रहे हैं।
निष्कर्ष
शेख कबीर की यह कथित फरारी सिर्फ एक व्यक्ति के भागने की घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के सामने एक चुनौती है। यह मामला दर्शाता है कि सत्ता से जुड़े लोगों को अब भी न्याय की पकड़ से बच निकलने के रास्ते मिल रहे हैं, चाहे सरकार कोई भी हो।
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