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बाघों के लिए क्यों छोटा पड़ने लगा रणथंभौर टाइगर रिजर्व:9 साल में 9 की जान गई; एक-दूसरे के खून के प्यासे हुए बाघ-बाघिन

इलाके की सीमित जगह बनी वजह, एक-दूसरे के खून के प्यासे हुए बाघ-बाघिन; वन विभाग अलर्ट


रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के सबसे चर्चित टाइगर रिजर्व में अब बाघों की आपसी जंग चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। बीते 9 साल में 9 बाघों की मौत ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है। सवाल उठ रहा है—क्या रणथंभौर अब बाघों के लिए छोटा पड़ने लगा है?


इलाके की कमी, बढ़ती टकराहट
रणथंभौर में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनका क्षेत्र सीमित है। ऐसे में टेरिटरी (इलाका) को लेकर बाघ और बाघिन आमने-सामने आ रहे हैं। यही टकराव कई बार खूनी संघर्ष में बदल जाता है।


एक-दूसरे के दुश्मन बन रहे बाघ
विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ स्वभाव से ही क्षेत्रीय (territorial) होते हैं। जब एक ही इलाके में कई बाघ रहते हैं, तो संघर्ष बढ़ना तय है। कई मामलों में नर बाघों के बीच लड़ाई इतनी खतरनाक हुई कि जान तक चली गई।


वन विभाग की बढ़ी चिंता
लगातार हो रही मौतों के बाद वन विभाग अब स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बाघों की मूवमेंट ट्रैक की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें दूसरे क्षेत्रों में शिफ्ट करने पर भी विचार किया जा रहा है।


टूरिज्म पर भी असर
रणथंभौर टाइगर रिजर्व पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है, लेकिन इस तरह की घटनाएं जंगल के संतुलन पर सवाल खड़े कर रही हैं। अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर पर्यटन पर भी पड़ सकता है।


निष्कर्ष:
रणथंभौर में बढ़ती बाघों की संख्या जहां सफलता की कहानी है, वहीं जगह की कमी अब बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो ‘जंगल का राजा’ खुद अपने ही अस्तित्व के लिए लड़ता नजर आएगा।

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