Related Articles
छत्तीसगढ़ (CG News): गोदावरी माइंस द्वारा बिना अनुमति सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर क्षेत्र का अवैध रूप से विस्तार किया जा रहा है। माइंस प्रबंधन ने वन विभाग की लापरवाही का फायदा उठाकर नियमों को दरकिनार कर दिया है।
पेड़ों की अवैध कटाई और अतिक्रमण
गोदावरी माइंस से लगे नारंगी क्षेत्र (कक्ष क्रमांक 608, खसरा 100, रकबा 5.76 हेक्टेयर) में बड़ी संख्या में पेड़ों की अवैध कटाई की गई है। इस अवैध कटाई को छिपाने के लिए कुछ पेड़ों को गड्ढों में दफना दिया गया, जबकि कुछ को बेचने की भी खबर सामने आई है।
वन विभाग को नहीं लगी भनक?
वन विभाग के अधिकारी अपने क्षेत्र का निरीक्षण नहीं कर रहे, जिसका फायदा माइंस प्रबंधन उठा रहा है। सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं, लेकिन वन विभाग को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। जानकारों का कहना है कि वन अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब हो रहा है, क्योंकि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सेफ्टी जोन में भी गड़बड़ी
गोदावरी माइंस के चारों ओर बनाए गए सेफ्टी जोन को बिना अनुमति तोड़ा गया और नया सेफ्टी जोन बना दिया गया। पुराने सेफ्टी जोन में लगे पेड़ों को भी काटकर हटा दिया गया।
बिना अनुमति सड़क निर्माण
माइंस प्रबंधन ने सड़क बनाने के लिए बिना अनुमति ही पेड़ों की कटाई कर दी। आरी डोंगरी माइंस से साल्हे मुय मार्ग तक फोरलेन कंक्रीट सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सड़क के किनारे लगे सागौन के पेड़ों को गिरा दिया गया और वनमार्ग को भी अनुमति लिए बिना बदला गया।
वन विभाग के अधिकारी चुप क्यों?
इस मामले को लेकर जब मुख्य वन संरक्षक दिलराज प्रभाकर, वन मंडल अधिकारी दुलेश्वर प्रसाद साहू और वन परिक्षेत्र अधिकारी मुकेश नेताम से संपर्क किया गया, तो किसी ने भी जवाब देना उचित नहीं समझा। इससे वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना होगा कि इस अवैध कटाई और अतिक्रमण के खिलाफ सरकार और वन विभाग क्या कार्रवाई करता है।
CHANNEL009 Connects India
