नई दिल्ली:
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इस घातक हमले के बाद पाकिस्तान में बेचैनी चरम पर है। लेकिन इस बार भारत ने पारंपरिक युद्ध के बजाय रणनीतिक तरीके से जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से लेकर राजनयिक स्थिति तक सब कुछ डगमगाने लगा है।
भारत ने बिना एक भी मिसाइल छोड़े पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे 9 कदम उठाए हैं, जो उसकी नींव को हिलाने के लिए काफी हैं। ये कार्रवाईयां ‘नो वॉर, ऑल इंपैक्ट’ रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।
भारत के वो 9 प्रहार, जिनसे पाकिस्तान थर्रा उठा
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अटारी-वाघा बॉर्डर सील: यातायात और व्यापार पर गहरा असर पड़ा, लोगों की आवाजाही ठप हुई।
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भारतीय राजनयिकों की वापसी: पाकिस्तान में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति सीमित कर दी गई।
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पाक उच्चायोग के स्टाफ में कटौती: ISI और सेना के सलाहकारों की मौजूदगी खत्म, पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित।
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SAARC वीजा सुविधा पर रोक: क्षेत्रीय समन्वय को कमजोर कर दिया गया।
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सिंधु जल संधि निलंबित: पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।
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डिजिटल स्ट्राइक: पाकिस्तान आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म, Youtubers और मीडिया चैनलों की आमदनी रोकी गई।
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भारतीय सेना को खुली छूट: नियंत्रण रेखा पर जवाबी कार्रवाई में तेज़ी लाई गई।
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सीमा पार गोलीबारी का जवाब: हर फायरिंग का सटीक और प्रभावी जवाब दिया जा रहा है।
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एयर स्पेस प्रतिबंध: पाकिस्तान को मिलने वाले करोड़ों के एविएशन रेवेन्यू पर रोक लगाई गई।
बिना युद्ध के पाकिस्तान में भारी तबाही
इन कदमों से पाकिस्तान की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि उसे रोज़ाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। खासतौर पर एयरस्पेस बंद होने से पाकिस्तान को करीब 78 लाख रुपये प्रति दिन की हानि हो रही है, वहीं भारत भी 10 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च झेल रहा है लेकिन उसने अपनी एयरलाइंस को राहत देकर इस भार को संभाल लिया है।
उधर, वीजा और बॉर्डर क्लोजिंग के फैसलों से इलाज और कारोबार के लिए भारत आने वाले पाकिस्तानियों को जबरदस्त मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत का अगला कदम: आर्थिक गिरावट की ओर धकेलना
भारत केवल कूटनीतिक ही नहीं, वित्तीय मोर्चे पर भी पाकिस्तान को दोहरी मार देने की तैयारी में है:
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FATF में फिर से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने की पहल
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IMF से मिलने वाले 7 बिलियन डॉलर के पैकेज को ब्लॉक करने की योजना
इस तरह भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन करने वाले देश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
डरे हुए हैं पाकिस्तानी नेता और सेना
भारत की इस अप्रत्याशित रणनीति से पाकिस्तान की सेना और सरकार असमंजस में हैं। न तो वे खुलकर जवाब दे पा रहे हैं और न ही आंतरिक दबाव संभाल पा रहे हैं। सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ाई जा रही है लेकिन भारत की अगली चाल का अंदाज़ा लगाने में वे असफल हैं।
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के नेता फजलुर रहमान जैसे नेता, जो पहले भारत को खुली धमकी देते थे, अब खामोश हैं। डर साफ है – भारत कुछ बड़ा कर सकता है।
निष्कर्ष: युद्ध के बिना ही पाकिस्तान को घुटनों पर लाने की रणनीति
भारत ने इस बार पारंपरिक युद्ध से अलग हटकर ऐसी रणनीति अपनाई है जो दीर्घकालिक रूप से पाकिस्तान की रीढ़ तोड़ सकती है। चाहे वह कूटनीतिक अलगाव हो, जल प्रबंधन हो, आर्थिक दबाव हो या डिजिटल मोर्चा – हर दिशा से पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव बनाया जा रहा है।
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