पटना। बिहार में जमीन से जुड़े विवाद अब जल्द ही खत्म हो सकते हैं। राज्य सरकार ने भूमि सर्वेक्षण और रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व और भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी ने बताया कि राज्य में 31 दिसंबर 2026 तक भूमि सर्वेक्षण का काम पूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब जमीन की खरीद-बिक्री के साथ ही नक्शा (मानचित्र) और रिकॉर्ड भी अपने आप अपडेट हो जाएंगे। इससे बार-बार जमीन बेचने और नामांतरण में गड़बड़ी जैसी समस्याएं खत्म होंगी।
🔹 अब तक का सबसे आधुनिक पोर्टल शुरू
पटना के शास्त्री नगर स्थित सर्वे भवन में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने ‘स्थानिक दाखिल-खारिज पोर्टल’ की शुरुआत की। यह पोर्टल IIT रुड़की द्वारा तैयार किया गया है और इसकी मदद से:
-
जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा
-
खरीद-बिक्री के साथ नक्शा अपने आप बदलेगा
-
जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे
🔸 बिहार बना देश का पहला राज्य
राजस्व मंत्री ने बताया कि बिहार देश का पहला राज्य है, जहां इतने उच्च तकनीक से जमीन का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। पहले कर्मचारी फाइलें और रजिस्टर लेकर घूमते थे, अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है। इससे नागरिकों को:
-
पारदर्शी
-
तेज
-
और भरोसेमंद सेवाएं मिलेंगी
🔹 अब एक ही जमीन बार-बार नहीं बिकेगी
विभागीय सचिव जय सिंह ने कहा कि पहले नक्शा अपडेट नहीं होता था, जिससे एक ही जमीन बार-बार बेची जाती थी। अब इस पोर्टल से यह गड़बड़ी नहीं होगी।
-
जमीन खरीद के साथ खेसरा नंबर (प्लॉट नंबर) भी खाते में जुड़ जाएगा
-
सरकारी जमीन आम लोगों के लॉगिन में नहीं दिखेगी, जिससे छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी
🔸 क्या-क्या मिलेगा इस पोर्टल पर?
नए पोर्टल पर ये सभी सुविधाएं एक जगह मिलेंगी:
-
दाखिल-खारिज
-
लगान भुगतान
-
ई-मापी (डिजिटल नाप)
-
भू-संवर्तन (भूमि सुधार)
-
न्यायालय प्रबंधन
🔹 नया सिस्टम कैसे करेगा काम?
ILRMS (Integrated Land Records Management System) के जरिए:
-
टेक्स्ट और नक्शे दोनों का डेटा एक जगह होगा
-
प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड और पारदर्शी होगी
-
जमीन विवाद काफी हद तक खत्म हो जाएंगे
निष्कर्ष:
बिहार सरकार का यह डिजिटल भूमि प्रबंधन सिस्टम राज्य में जमीन विवादों को कम करेगा और जमीन खरीदने-बेचने की प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और तेज़ बनाएगा। 2026 तक पूरा राज्य इस आधुनिक व्यवस्था से जुड़ जाएगा।
CHANNEL009 Connects India
