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बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट के सामने चल रहा महापड़ाव बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान अनशन पर बैठे कई आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने लगी। अब तक 458 पर्यावरण प्रेमी, जिनमें 60 महिलाएं और 29 संत शामिल हैं, अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठे हैं।
दोपहर में दो अनशनकारी संत लालदास और मांगीलाल की तबीयत ज्यादा खराब हो गई, जिन्हें एंबुलेंस से पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा 12 अन्य अनशनकारियों को पास की बिश्नोई धर्मशाला में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
प्रभात फेरी और नारे
बुधवार सुबह आंदोलनकारियों ने प्रभात फेरी निकाली। हाथों में तख्तियां लेकर “पेड़ बचाओ, वन्यजीव बचाओ” और “विकास के नाम पर विनाश नहीं” जैसे नारे लगाए। दिनभर संतों के प्रवचन हुए और कई सामाजिक संगठनों व नेताओं ने आंदोलन को समर्थन दिया।
सोशल मीडिया के जरिए लोगों से एक दिन का अनशन रखने की अपील की गई, जिसका असर भी दिखा। खासतौर पर बिश्नोई समाज के कई परिवारों ने घर पर व्रत रखकर समर्थन जताया।
सरकार को चेतावनी
मुकाम पीठाधीश्वर रामानंद आचार्य और सच्चिदानंद आचार्य ने कहा कि सरकार से सिर्फ इतनी मांग है कि कानून बनने तक खेजड़ी की कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए। अगर गुरुवार दोपहर तक मांग नहीं मानी गई, तो समर्थन न करने वाले नेताओं का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
संतों ने साफ कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाने के लिए है।
कलेक्ट्रेट छावनी में बदला
महापड़ाव के चलते कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और सिर्फ पैदल आने-जाने की अनुमति है।
मौन संकल्प और खेजड़ी पूजन
अनशनकारी पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। पानी की एक बूंद तक न पीने का संकल्प लिया गया है। सुबह संतों के सान्निध्य में खेजड़ी पूजन किया गया। लोग मुंह पर उंगली रखकर मौन संकल्प में खड़े नजर आए, जिससे माहौल भावुक हो गया।
अस्थायी अस्पताल बनाया गया
कई अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशासन ने बातचीत की और बिश्नोई धर्मशाला में अस्थायी अस्पताल बनाया गया। जांच के बाद चार गंभीर मरीजों को पीबीएम अस्पताल भेजा गया। मौके पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
प्रदेशभर से मिल रहा समर्थन
संघर्ष समिति के संयोजक रामगोपाल बिश्नोई ने बताया कि पूरे प्रदेश से लोग आंदोलन के समर्थन में पहुंच रहे हैं। कई संत, सामाजिक संगठन और राजनीतिक नेता आंदोलन के साथ खड़े हैं।
शुक्रवार को अनाज मंडियां बंद
बीकानेर कच्ची आड़त व्यापार संघ ने आंदोलन के समर्थन में शुक्रवार को जिले की सभी अनाज मंडियां बंद रखने का ऐलान किया है। व्यापारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर आंदोलन को समर्थन भी दिया।
खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब और तेज होता जा रहा है, और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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