इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है। मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारत ने शानदार संघर्ष करते हुए मुकाबला ड्रॉ करा लिया, लेकिन अब ओवल में होने वाले आखिरी टेस्ट से पहले टीम इंडिया के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है — क्या हमारी प्लेइंग इलेवन और गेंदबाजी संयोजन सही है?
इस सीरीज में भारत ने आठवें नंबर तक बल्लेबाजों को मौका देने की रणनीति अपनाई है। इसका मतलब यह हुआ कि एक विशेषज्ञ गेंदबाज की जगह ऑलराउंडर को तरजीह मिली। लेकिन इसी रणनीति पर अब सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब शार्दुल ठाकुर, जिन्हें नीतीश रेड्डी की जगह शामिल किया गया, उन्हें मैनचेस्टर टेस्ट में सिर्फ 11 ओवर ही गेंदबाजी करने दी गई।मैनचेस्टर टेस्ट में इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 600 से ज्यादा रन बनाए — जो कि 2014 के बाद पहली बार हुआ। इससे साफ हो गया कि भारत की गेंदबाजी लाइनअप कमजोर साबित हुई। बल्लेबाजी गहराई के चक्कर में टीम विकेट लेने की ताकत खो बैठी।
टीम के पास अब कुलदीप यादव जैसा एक कलाई का स्पिनर है जो लंबे समय से बेंच पर बैठा है। कुलदीप विकेट लेने की काबिलियत रखते हैं और उन्हें अब प्लेइंग इलेवन में मौका देना ज्यादा जरूरी लग रहा है। तेज गेंदबाजों के साथ-साथ एक ऐसा स्पिनर टीम को बैलेंस दे सकता है।
अब जब आखिरी मुकाबला सिर्फ तीन दिन दूर है, टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होगा कि वह बैटिंग को प्राथमिकता देता है या विकेट लेने वाले बॉलर्स को। ओवल की पिच पर गेंदबाजों को मदद मिल सकती है, ऐसे में एक संतुलित टीम के साथ उतरना भारत के लिए जरूरी है।
शार्दुल ठाकुर की जगह कुलदीप यादव को मौका मिल सकता है
गेंदबाजी संयोजन में ज्यादा विविधता की जरूरत
बल्लेबाजी गहराई और बॉलिंग स्ट्रेंथ में संतुलन बनाना जरूरी
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