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बारां जिले में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 12 फरवरी 2026 से शुरू होने जा रही हैं। लेकिन परीक्षा से कुछ ही दिन पहले तक भी हजारों छात्रों को मॉडल प्रश्नपत्र नहीं मिल पाए हैं। इससे विद्यार्थियों में भ्रम और तनाव बढ़ गया है।
करीब 30 हजार छात्र प्रभावित
इस साल जिले में
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कक्षा 10वीं के लगभग 18 हजार
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कक्षा 12वीं के करीब 14 हजार
विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यानी करीब 30 हजार छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
परीक्षा पैटर्न समझने में दिक्कत
मॉडल प्रश्नपत्र नहीं मिलने से छात्रों को
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नए परीक्षा पैटर्न
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प्रश्नों के प्रकार
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अंक विभाजन
समझने में परेशानी हो रही है। इसका असर उनकी तैयारी और आत्मविश्वास पर साफ दिख रहा है।
वेबसाइट पर पेपर, लेकिन स्थानीय अभ्यास कम
बोर्ड ने 2023 से 2026 तक के मॉडल प्रश्नपत्र अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दिए हैं। इनमें प्रश्नपत्र की योजना और अंकभार की जानकारी है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इन्हीं के आधार पर अभ्यास कराया जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर नए मॉडल पेपर नहीं मिलने से छात्रों को पर्याप्त अभ्यास नहीं मिल पा रहा।
जल्दी सत्र शुरू होने से बनी समस्या
शिक्षा विभाग के अनुसार, नया सत्र जल्दी शुरू होने के कारण इस बार स्कूलों में स्थानीय मॉडल प्रश्नपत्र तैयार नहीं हो सके। पहले स्कूल स्तर पर नए पैटर्न के अनुसार पेपर बनते थे, जिससे छात्रों को परीक्षा का सही अंदाजा मिलता था।
शिक्षक संघ ने जताई चिंता
शिक्षक संघ ने इसे छात्रों के साथ अन्याय बताया है। उनका कहना है कि कई विषयों में अब 80 अंकों का थ्योरी पेपर है, ऐसे में नए पैटर्न पर आधारित मॉडल प्रश्नपत्र और ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
छात्रों पर बढ़ रहा मानसिक दबाव
मॉडल प्रश्नपत्रों की कमी से छात्रों में
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परीक्षा को लेकर भ्रम
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समय प्रबंधन की दिक्कत
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आत्मविश्वास की कमी
जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
समाधान की मांग
शिक्षक संघ ने मांग की है कि
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ऑनलाइन और ऑफलाइन अतिरिक्त अभ्यास सामग्री दी जाए
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स्कूलों में काउंसलिंग सत्र आयोजित हों
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मॉक टेस्ट और यूनिट टेस्ट की संख्या बढ़ाई जाए
शिक्षा अधिकारी का बयान
जिला शिक्षा अधिकारी सीताराम गोयल ने बताया कि कार्यशालाओं के जरिए शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि अतिरिक्त कक्षाओं में अधिक से अधिक संभावित प्रश्नों का अभ्यास कराया जाए। इस काम की निगरानी प्रधानाचार्य स्वयं करेंगे।
निष्कर्ष
परीक्षा सिर पर है, लेकिन मॉडल प्रश्नपत्रों की कमी से जिले के हजारों छात्र असमंजस में हैं। समय रहते अतिरिक्त अभ्यास सामग्री और सही मार्गदर्शन मिला, तो छात्रों को राहत मिल सकती है।
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