इस्लामाबाद – आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना कर रहा पाकिस्तान अब अपनी छवि सुधारने के प्रयास में जुट गया है। भारत की कूटनीतिक पहल से प्रेरित होकर पाकिस्तान ने भी वैश्विक मंचों पर शांति और सहयोग का संदेश देने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है।
हाल ही में भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और शांति के संदेश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों तक पहुंचाने के लिए सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों को भेजने की योजना बनाई है। इसी नीति से प्रभावित होकर पाकिस्तान ने भी अपने कूटनीतिक कदम तेज़ किए हैं।
बिलावल भुट्टो को सौंपा गया जिम्मा
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए कहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का पक्ष रखेगा।
फेसबुक पोस्ट में जरदारी ने कहा, “मैं इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं और इन चुनौतीपूर्ण समय में देश की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।” उनका यह बयान पाकिस्तान के बदलते कूटनीतिक रुख की ओर इशारा करता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब देश को आतंकवाद को लेकर वैश्विक अस्वीकार्यता का सामना करना पड़ रहा है।
चुनौतियों भरा होगा यह मिशन
हालांकि पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पहल आसान नहीं होगी। हाल ही में भारत ने कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया, जिनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से था। यह घटनाक्रम पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के लिए वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना और भी कठिन बना देता है।
छवि सुधारने की कोशिश या रणनीतिक मजबूरी?
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान की एक रणनीतिक जरूरत भी हो सकती है, क्योंकि वह लंबे समय से आतंकवाद के मुद्दे पर अलग-थलग पड़ा है। भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और सशक्त कूटनीति के बीच पाकिस्तान अब एक समानांतर छवि गढ़ने की कोशिश कर रहा है – जिसमें ‘शांति’ और ‘संवाद’ को केंद्र में रखा गया है।
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