वॉशिंगटन/नई दिल्ली:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में संकेत दिया कि अमेरिका और भारत के बीच एक “बहुत बड़ा” व्यापार समझौता जल्द सामने आ सकता है। उन्होंने यह बात व्हाइट हाउस में आयोजित ‘बिग ब्यूटीफुल इवेंट’ में कही।
“कुछ महीनों पहले तक मीडिया पूछ रहा था कि क्या कोई बड़ी डील बन रही है। हमने कल ही चीन के साथ समझौता किया है, और अब एक भारत के साथ हो सकता है। यह काफी महत्वपूर्ण और व्यापक समझौता होगा,” ट्रंप ने कहा।
“हर देश के साथ डील ज़रूरी नहीं”
अपने बयान में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका हर देश से व्यापार समझौता नहीं करेगा। “कुछ देशों को हम बस एक चिट्ठी भेज देंगे — धन्यवाद, अब से 25 से 45 प्रतिशत शुल्क लगेगा। यह आसान तरीका है। लेकिन मेरी टीम कुछ समझौते करना चाहती है, तो हम कुछ डील्स जरूर करेंगे,” उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा।
चार दिवसीय भारत-अमेरिका वार्ता पूरी
बताया गया कि भारत और अमेरिका के बीच चार दिन चली व्यापार वार्ता हाल ही में समाप्त हुई। दोनों पक्षों ने औद्योगिक और कृषि वस्तुओं को लेकर बाजार पहुंच, टैरिफ कटौती और गैर-शुल्क बाधाओं पर चर्चा की। अमेरिका की ओर से यह वार्ता यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव कार्यालय ने नेतृत्व में की गई, जबकि भारत की तरफ से वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधित्व किया।
भारत और अमेरिका के बीच वर्तमान वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार लगभग $190 बिलियन है, जिसे 2030 तक $500 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
गॉयल और लुटनिक की पुष्टि
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने वार्ता के समापन पर कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देशों के लिए यह समझौता व्यवसाय और आम जनता के लिए लाभकारी होगा। हम एक संतुलित और पारदर्शी समझौते की ओर बढ़ रहे हैं।”
इससे पहले, अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने भी संकेत दिए थे कि दोनों देशों के हितों के बीच सहमति बन रही है, और एक समझौता “बहुत जल्द” हो सकता है।
चीन के साथ भी समझौता
इस कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका ने चीन के साथ भी एक नई व्यापार डील पर हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि इस समझौते के तहत चीन रेयर-अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति में तेजी लाएगा, जो अमेरिका के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इसके अलावा, अमेरिका और चीन ने जिनेवा समझौते को लागू करने के लिए एक संयुक्त ढांचा तैयार करने पर भी सहमति जताई है।
निष्कर्ष
यदि अमेरिका और भारत के बीच यह “बड़ा व्यापार समझौता” सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए रणनीतिक लाभ लेकर आएगा, खासकर तकनीक, फार्मा, कृषि और रक्षा जैसे क्षेत्रों में।
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