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भारत के S-400 से हिला चीन! जवाब में ला रहा है AI ड्रोन मदरशिप

भारत के घातक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सटीक मारक क्षमता ने न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि चीन को भी चिंता में डाल दिया है। हाल ही में जब पाकिस्तान ने तुर्की से मिले ड्रोन के जरिए भारत पर हमला करने की कोशिश की, तब S-400 ने पल भर में सारे ड्रोनों को हवा में ही खत्म कर दिया। यह नजारा देख चीन को भी यह अहसास हो गया कि उसे अपनी रणनीति को नए सिरे से गढ़ना होगा।

AI तकनीक से लैस ड्रोन ‘मदरशिप’ की तैयारी

चीन अब एक ऐसे हाई-टेक ड्रोन प्रोग्राम पर काम कर रहा है, जिसमें AI तकनीक के माध्यम से ‘मदरशिप ड्रोन’ लॉन्च किया जाएगा। यह विशाल ड्रोन एकसाथ 100 से ज्यादा छोटे ड्रोन को हवा में छोड़ सकता है। सभी ड्रोनों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रिमोट कंट्रोल से संचालित किया जाएगा, जो दुश्मन के एयर डिफेंस, रडार और सैन्य ठिकानों पर एकसाथ हमला करने में सक्षम होंगे।

स्वार्म टेक्नोलॉजी का उपयोग, अमेरिका भी सतर्क

यह नया चीनी हथियार ‘स्वार्म टेक्नोलॉजी’ पर आधारित होगा, जिसमें दर्जनों मिनी-ड्रोन समन्वयित हमले को अंजाम देंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें PL-12E एयर-टू-एयर मिसाइलें भी होंगी। इस क्षमता को देखकर अमेरिका तक सतर्क हो गया है, क्योंकि यह प्रणाली पारंपरिक डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सकती है।

S-400: भारत की सुरक्षा का सबसे ताकतवर कवच

S-400 मिसाइल सिस्टम रूस से भारत को प्राप्त हुआ है और यह 400 किलोमीटर तक के लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह विमान, मिसाइल और ड्रोन जैसे टारगेट्स को सटीकता से पहचान कर नष्ट कर सकता है। पाकिस्तान की हालिया नाकामी ने चीन को यह संकेत दे दिया है कि भारत की हवाई सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

ड्रोन मदरशिप कैसे काम करती है?

चीन का ड्रोन मदरशिप एक विशाल फ्लाइंग प्लेटफॉर्म होगा, जो न केवल खुद हथियारों से लैस होगा, बल्कि दर्जनों स्वायत्त ड्रोन को युद्ध के दौरान तैनात कर सकता है। AI तकनीक के जरिए यह पूरे हमले को नियंत्रित करेगा और जरूरत पड़ने पर रीयल टाइम रणनीति भी बदल सकेगा, जिससे उसका पता लगाना और मार गिराना कठिन हो जाएगा।

भारत की तैयारी: S-400 के साथ एंटी-ड्रोन तकनीक भी मजबूत

भारत न केवल S-400 पर निर्भर है, बल्कि डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘ड्रोन डोम’ और अन्य स्वदेशी तकनीकों से भी अपनी सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। ये सिस्टम छोटे और तेज गति से उड़ने वाले ड्रोन को भी प्रभावी रूप से रोक सकते हैं। साथ ही, भारत थलसेना और वायुसेना में कई स्तरों पर एंटी-ड्रोन यूनिट्स की तैनाती कर रहा है।

भविष्य में S-500 और लेजर टेक्नोलॉजी से और मजबूत होगा भारत

रूस द्वारा विकसित किया जा रहा S-500 ‘प्रोमेथियस’ सिस्टम आने वाले वर्षों में भारत की डिफेंस कैपेबिलिटी को और ज्यादा बढ़ा सकता है। यह सिस्टम हाइपरसोनिक मिसाइलों और लो-फ्लाइंग टारगेट्स को भी ट्रैक कर सकता है। इसके अलावा, भारत लेजर और माइक्रोवेव आधारित एंटी-ड्रोन हथियारों पर भी तेजी से काम कर रहा है।

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