भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, एशिया से एक अहम रणनीतिक खबर सामने आई है। जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान ने भारत को आधिकारिक रूप से Global Combat Air Programme (GCAP) का हिस्सा बनने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रोजेक्ट में पहले से ही जापान, ब्रिटेन और इटली जैसे देश मिलकर अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को विकसित कर रहे हैं।
भारत को क्यों दिया गया प्रस्ताव?
जापान की समाचार एजेंसी क्योदो न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्ताव भारत को फरवरी 2025 में जापानी प्रतिनिधिमंडल की एक यात्रा के दौरान सौंपा गया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य GCAP की लागत को साझा करना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत के साथ रक्षा साझेदारी को मजबूत करना है।
हालांकि, शुरुआती स्तर पर जापानी अधिकारियों ने भारत को लेकर कुछ संकोच जताया था, खासतौर पर भारत के रूसी S-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और जापान ने भारत को इस अत्याधुनिक प्रोग्राम का संभावित भागीदार मानते हुए आमंत्रण भेजा है।
GCAP क्या है?
GCAP एक बहुराष्ट्रीय रक्षा परियोजना है, जिसका मकसद 6वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स तैयार करना है। यह कार्यक्रम 2022 में शुरू हुआ था और अब तक जापान, ब्रिटेन और इटली इसकी कमान संभाले हुए हैं। इस साल के अंत तक इसके डिज़ाइन को अंतिम रूप देने की योजना है।
इस परियोजना में प्रमुख कंपनियां जैसे मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज (जापान), बीएई सिस्टम्स (ब्रिटेन) और लियोनार्डो (इटली) एकीकृत रूप से काम कर रही हैं। लेकिन आधुनिक फाइटर जेट बनाना बेहद महंगा और जटिल है, इसलिए लागत कम करने और तकनीकी योगदान बढ़ाने के लिए नए साझेदारों की तलाश की जा रही है।
कौन-कौन देश बन सकते हैं भागीदार?
स्वीडन ने 2023 में इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था। सऊदी अरब ने भी अपनी दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन जापान ने फिलहाल उस पर आपत्ति जताई है। ऐसे में भारत को एक विश्वसनीय और रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, भारत का “मेक इन इंडिया” अभियान और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम GCAP के उद्देश्यों के साथ मेल खाते हैं। भारत की भागीदारी इस प्रोजेक्ट को नई तकनीकी गहराई और रणनीतिक संतुलन दे सकती है।
क्या भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा?
चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के पास पहले से स्टेल्थ लड़ाकू विमानों की मौजूदगी भारत के लिए दबाव की स्थिति पैदा करती है। ऐसे में GCAP जैसी परियोजना भारत को रक्षा क्षेत्र में तकनीकी बढ़त दिला सकती है। हालाँकि, भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लेकिन यह साफ है कि अगर भारत इस साझेदारी में शामिल होता है, तो यह न केवल उसकी सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक रक्षा मंच पर भी उसकी स्थिति को मज़बूत करेगा।
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