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वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति फिर से दिखा दी है। अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक बातचीत के दौरान भारत ने साफ कर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में किसी के दबाव में नहीं आएगा। भारत ने स्पष्ट कहा कि देश के नागरिकों का हित सबसे पहले है और जहां भी सस्ता कच्चा तेल मिलेगा, भारत उसे खरीदने के लिए स्वतंत्र है।
मुख्य बातें:
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भारत ने बताया कि उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है 140 करोड़ नागरिकों को किफायती दरों पर पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा देना। महंगे तेल से महंगाई बढ़ सकती है और आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा।
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भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85% से ज्यादा आयात करता है। अगर कहीं डिस्काउंट पर तेल मिलता है, तो उसे ठुकराना देश के लिए नुकसानदेह होगा।
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यह फैसला किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि भारतीय जनता के हित में लिया गया है।
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भारत ने अमेरिका को स्पष्ट कर दिया कि ऊर्जा आयात को द्विपक्षीय व्यापार समझौतों की शर्तों से अलग रखा जाए।
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यह कदम ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश, खासकर अमेरिका और यूरोपीय संघ, भारत पर रूसी तेल का आयात कम करने का दबाव डाल रहे थे।
ग्लोबल संदेश:
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह रुख दर्शाता है कि ‘नया भारत’ अब अपनी शर्तों पर दुनिया से बात करता है। यह न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा, बल्कि दूसरे विकासशील देशों के लिए भी उदाहरण बनेगा कि राष्ट्रीय हितों को बनाए रखते हुए भी बड़े देशों के साथ संबंध बनाए जा सकते हैं।
सारांश में, भारत ने साफ कर दिया कि सस्ता तेल खरीदना सिर्फ व्यापार का फैसला नहीं, बल्कि जनहित का मुद्दा है।
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